- छोटे सराफा व्यापारियों के हितों की सुरक्षा की मांग देवास (ईएमएस)। ज्वेलर्स डेवलपमेंट वेलफेयर एसोसिएशन (जेडीडब्लूयुए) ने भारत सरकार के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अंतर्गत महानिदेशालय विदेशी व्यापार (डीजीएफटी) द्वारा जारी नोटिफिकेशन के तहत चांदी (सिल्वर बार्स) के आयात को फ्री श्रेणी से रस्ट्रिक्टड श्रेणी में किए जाने पर गंभीर चिंता व्यक्त की है। संगठन अध्यक्ष संजय जैन एवं सचिव संतोष सराफ ने कहा कि विदेशी मुद्रा संरक्षण एवं आयात संतुलन बनाए रखना सरकार का अधिकार है, किंतु ऐसी नीतियों का प्रतिकूल प्रभाव छोटे एवं पारंपरिक सराफा व्यापारियों, कारीगरों तथा ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर नहीं पडऩा चाहिए। जेडीडब्लूयुए के अनुसार भारत में चांदी केवल व्यापारिक वस्तु नहीं, बल्कि ग्रामीण एवं आदिवासी समाज की सांस्कृतिक, पारंपरिक एवं आर्थिक सुरक्षा का महत्वपूर्ण माध्यम है। विशेष रूप से मध्य भारत, आदिवासी क्षेत्रों एवं ग्रामीण बाजारों में चांदी आभूषणों का व्यापक उपयोग होता है। संगठन का कहना है कि यदि आयात प्रतिबंधों के कारण चांदी की उपलब्धता प्रभावित होती है या कीमतों में असामान्य वृद्धि होती है, तो इसका सीधा असर छोटे ज्वेलर्स, हस्तशिल्प कारीगरों और आम उपभोक्ताओं पर पड़ेगा। संगठन ने आशंका जताई कि यदि आयात व्यवस्था केवल बड़े आयातकों एवं कॉर्पोरेट ट्रेडिंग संस्थानों तक सीमित हो गई, तो बाजार में असंतुलन और एकाधिकार जैसी स्थिति उत्पन्न हो सकती है, जिससे छोटे सराफा व्यापारियों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता कमजोर होगी। जेडीडब्लूयुए ने केंद्र सरकार से मांग की है कि छोटे एवं एमएसएमई श्रेणी के सराफा व्यापारियों के लिए अलग सिल्वर इम्पोर्ट कोटा निर्धारित किया जाए तथा छोटे ज्वेलर्स हेतु सरल एवं पारदर्शी अनुमति प्रक्रिया लागू की जाए। साथ ही ग्रामीण, पारंपरिक एवं आदिवासी चांदी आभूषण उद्योग को विशेष संरक्षण देने, बाजार में कॉर्पोरेट मोनोपॉली रोकने के लिए संतुलित आयात वितरण व्यवस्था बनाने तथा नोटिफिकेशन में उल्लेखित पालिसी कंडीशन नं. 7 को सार्वजनिक एवं स्पष्ट करने की मांग भी की गई है। संगठन ने कहा कि वर्तमान में छोटे सराफा व्यापारी पहले से ही जीएसतटी अनुपालन, हॉलमार्किंग , बढ़ती लागत, बैंकिंग प्रतिबंधों एवं बाजार मंदी जैसी चुनौतियों का सामना कर रहे हैं। ऐसे में यदि कच्चे माल की उपलब्धता प्रभावित होती है और कीमतें बढ़ती हैं, तो इसका सबसे अधिक असर छोटे व्यापारियों एवं कारीगर वर्ग पर पड़ेगा। अंत में जेडीडब्लूयुए ने केंद्र सरकार से आग्रह किया कि छोटे ज्वेलर्स, पारंपरिक कारीगरों एवं ग्रामीण सराफा उद्योग के हितों की रक्षा के लिए तत्काल संवाद प्रक्रिया प्रारंभ कर व्यावहारिक समाधान निकाला जाए। ईएमएस/मोहने/ 17 मई 2026