काठमांडू(ईएमएस)। काठमांडू से आई एक ताजा रिपोर्ट ने चीन की महत्वाकांक्षी बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (बीआरआई) की जमीनी हकीकत पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। नेपाल ने वर्ष 2017 में चीन के साथ बड़े सपनों और उम्मीदों के साथ बीआरआई समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। लेकिन इस समझौते के नौ साल बाद भी जमीन पर कोई बड़ा प्रोजेक्ट आकार नहीं ले सका है और नेपाल के हाथ अब तक लगभग खाली हैं। नेपाल और चीन के बीच 12 मई 2017 को इस ऐतिहासिक समझौते के तहत समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए थे, जिससे नेपाल में इंफ्रास्ट्रक्चर और कनेक्टिविटी के क्षेत्र में बड़े बदलाव की उम्मीद थी। हालांकि, वर्ष 2026 तक के मौजूदा हालात यह साफ बयां करते हैं कि कोई भी प्रमुख परियोजना अब तक पूरी तरह लागू नहीं हो पाई है। इस बीच दोनों देशों के बीच पोखरा इंटरनेशनल एयरपोर्ट को लेकर भी गहरा विवाद खड़ा हो गया है। चीन ने पश्चिमी नेपाल में बने इस एयरपोर्ट को बीआरआई की एक बड़ी उपलब्धि के रूप में प्रचारित करने की कोशिश की, लेकिन नेपाल सरकार ने इसे बीआरआई परियोजना मानने से साफ इनकार कर दिया। नेपाल का रुख स्पष्ट है कि पोखरा एयरपोर्ट पर बातचीत चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग द्वारा 2013 में बीआरआई की घोषणा करने से पहले ही शुरू हो चुकी थी। नेपाल के तत्कालीन विदेश मंत्री एन पी सऊद ने भी संसद में यह स्वीकार किया था कि देश में एक भी बीआरआई प्रोजेक्ट जमीन पर नहीं उतर सका है। शुरुआती दौर में नेपाली पक्ष ने इसके तहत 35 परियोजनाओं का प्रस्ताव रखा था, जिसे बाद में चीन के सुझाव पर घटाकर केवल नौ कर दिया गया। दिलचस्प बात यह है कि बीआरआई के तहत प्रस्तावित परियोजनाओं में से एक, 480 मेगावाट के फुकोट करनाली हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट की कमान अब भारत की एनएचपीसी लिमिटेड और विद्युत उत्पादन कंपनी लिमिटेड ने संभाल ली है और दोनों मिलकर इसे विकसित कर रहे हैं। वहीं, 756 मेगावाट के तमोर स्टोरेज हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट को लेकर भी नेपाल और चीन के बीच मतभेद गहरे बने हुए हैं। दिसंबर 2024 में तत्कालीन प्रधानमंत्री के.पी. शर्मा ओली की चीन यात्रा के दौरान दोनों पक्षों ने बीआरआई कार्यान्वयन योजना पर हस्ताक्षर तो किए, जिसके तहत सीमा-पार रेलवे सहित 10 नई परियोजनाएं चुनी गईं। इसके बावजूद, केरुंग-काठमांडू रेलवे जैसी कुछ परियोजनाओं पर केवल शुरुआती कागजी काम ही चल रहा है। नेपाल अब चीन के साथ अपनी रणनीति में बेहद सतर्कता बरत रहा है, जिससे इस महापरियोजना का भविष्य फिलहाल अधर में लटका नजर आ रहा है। वीरेंद्र/ईएमएस 18 मई 2026