राष्ट्रीय
18-May-2026
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-सीबीआई को उम्मीद अभी कई परतें खुलनी बाकी लातूर,(ईएमएस)। राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट) में कथित पेपर लीक मामले की जाँच में जुटी केंद्रीय जाँच ब्यूरो (सीबीआई) ने अपनी कार्रवाई तेज कर सोमवार को महाराष्ट्र के लातूर से एक बड़े कोचिंग सेंटर के निदेशक शिवराज मोटेगांवकर को गिरफ्तार किया। इस गिरफ्तारी के साथ ही हाई-प्रोफाइल मामले में अब तक कुल 10 आरोपी सलाखों के पीछे पहुँच चुके हैं। सीबीआई को संदेह है कि मोटेगांवकर के कोचिंग सेंटर रेणुकाई कैमिस्ट्री क्लासेस (आरसीसी) के माध्यम से नीट के प्रश्नपत्र लीक किए गए थे और छात्रों व स्थानीय डॉक्टरों तक पहुँचाया गया। बात दें कि मोटेगांवकर, जो लातूर सहित सात जिलों में रेणुकाई कैमिस्ट्री क्लासेस (आरसीसी) नामक कोचिंग सेंटर चलाता है, से पहले 15 मई को उसके घर पर आठ घंटे तक पूछताछ की गई थी। इसके बाद रविवार को सीबीआई ने आरसीसी के मुख्य कार्यालय पर छापा मारकर कई महत्वपूर्ण दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जब्त किए। रिपोर्टों के अनुसार, इस कोचिंग सेंटर का वार्षिक टर्नओवर 100 करोड़ रुपये तक बताया जा रहा है, जो इसकी व्यापक पहुँच और क्षमता को दिखाता है। सीबीआई को शक है कि लातूर के कई रसूखदार डॉक्टरों ने भी लीक हुए प्रश्नपत्रों को मोटी रकम देकर खरीदा था, जिससे उनके बच्चों या अन्य उम्मीदवारों को अनुचित लाभ मिल सके। जांच एजेंसी सीबीआई के मुताबिक लातूर को पूरे सिंडिकेट का महत्वपूर्ण केंद्र बताया जा रहा है, जहाँ कथित तौर पर मेडिकल प्रवेश परीक्षा की पवित्रता के साथ खिलवाड़ हुआ। लातूर, जो अपनी शैक्षिक संस्कृति और कोचिंग केंद्रों के लिए मशहूर है, अब एक बड़े घोटाले के केंद्र के रूप में उभर रहा है। सीबीआई को पुख्ता सबूत मिले हैं कि इस नेटवर्क के तार न केवल स्थानीय स्तर पर, बल्कि देश के अन्य राज्यों, विशेषकर बिहार और उत्तर प्रदेश से भी जुड़े हुए हैं। जांच एजेंसी को शुरुआती पड़ताल में सामने आया है कि लातूर के कुछ नामी डॉक्टर उस बड़े गिरोह से जुड़े थे जो पहले से ही बिहार और उत्तर प्रदेश में सक्रिय था। इन डॉक्टरों ने कथित तौर पर छात्रों को पेपर उपलब्ध कराने और परीक्षा के दौरान सॉल्वर गैंग का इंतजाम करने में अहम भूमिका निभाई। सीबीआई अब संदिग्ध वित्तीय लेन-देन की भी पड़ताल कर रही है, जो परीक्षा से ठीक पहले इन संदिग्धों के खातों में हुए थे। मोटेगांवकर की गिरफ्तारी के साथ ही नीट-यूजी पेपर लीक मामले में अब तक कुल 10 आरोपी सलाखों के पीछे पहुँच चुके हैं, जिसमें से पांच महाराष्ट्र से हैं और इसमें दो महिलाएं शामिल हैं। सीबीआई को कुछ गिरफ्तार आरोपियों के मोबाइल डेटा से लातूर के मोबाइल टावरों की लोकेशन मिली थी, जिससे लातूर कनेक्शन सामने आया। इस बीच, इस संवेदनशील मुद्दे पर राजनीति भी जोर-शोर से जारी है। इस पूरे विवाद ने लाखों मेडिकल उम्मीदवारों और उनके अभिभावकों के भविष्य पर गहरा सवालिया निशान खड़ा कर दिया है। छात्रों में भारी गुस्सा है और वे मांग कर रहे हैं कि इस धांधली में शामिल सभी प्रभावशाली लोगों पर सख्त से सख्त कार्रवाई की जाए और नीट यूजी परीक्षा की पूरी प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी बनाया जाए। सीबीआई की सक्रियता से दोषियों तक पहुंचने की उम्मीदें बढ़ी हैं, लेकिन इस पूरे नेटवर्क की कमर तोड़ने में अभी भी कई परतें खुलनी बाकी हैं। केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय भी इस पूरे घटनाक्रम पर बारीकी से नजर रखे हुए है, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके। आशीष दुबे / 18 मई 2026