कांग्रेस सांसद जयराम रमेश ने खोल दिया मोर्चा नई दिल्ली,(ईएमएस)। नीट पेपर लीक मामले में कांग्रेस केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद प्रधान को बक्शा के मूड में नहीं दिख रही है। इसी कड़ी में सोमवार को कांग्रेस सांसद जयराम रमेश ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रधान के खिलाफ राज्यसभा में विशेषाधिकार नोटिस दे दिया है। उन पर संसद और उसकी समितियों की गरिमा को ठेस पहुंचाने वाली टिप्पणियां करने का आरोप है। यह नोटिस राज्यसभा की कार्य प्रक्रिया एवं संचालन नियमों के नियम 187 के तहत दायर किया गया है। कांग्रेस नेता रमेश ने इसकी जानकारी देकर बताया कि उन्होंने शिक्षा मंत्री के खिलाफ संसद और संसदीय समितियों की गरिमा को ठेस पहुंचाने के आरोप में यह विशेषाधिकार का प्रश्न उठाया है। यह घटना देश में चल रहे नीट-यूजी परीक्षा विवाद के बीच एक नया राजनीतिक तूफान लेकर आई है। कांग्रेस सांसद रमेश ने आरोप लगाया कि ये टिप्पणियां तब की गईं जब केंद्रीय मंत्री शिक्षा मंत्रालय में व्याप्त गंभीर भ्रष्टाचार की अध्यक्षता कर रहे थे, जो लाखों युवाओं के भविष्य को तबाह कर रहा है। धर्मेंद्र प्रधान ने ये विवादित बयान नीट-यूजी प्रश्नपत्र लीक के संबंध में एक प्रेसवार्ता के दौरान दिए थे। उनसे शिक्षा पर संसदीय स्थायी समिति की सिफारिशों पर केंद्रीय मंत्रालय की प्रतिक्रिया के बारे में पूछा गया था। नोटिस के अनुसार, केंद्रीय मंत्री प्रधान ने अपनी टिप्पणी में कहा था, मैं संसदीय स्थायी समिति की चेतावनियों पर कोई टिप्पणी नहीं करूंगा। मैं उच्च स्तरीय विशेषज्ञ समिति (एचएलसीई)/राधाकृष्णन समिति के बारे में बात करूंगा। संसदीय स्थायी समिति में विपक्ष के सदस्य हैं। वे चीजों को एक विशेष तरीके से लिखते हैं, यह आप भी जानते हैं। इसलिए, मैं स्थायी समिति पर कुछ नहीं बोलूंगा। कांग्रेस नेता रमेश ने मंत्री के इन बयानों को अत्यंत निंदनीय और बेहद अपमानजनक करार दिया है, जो संसदीय संस्थाओं की नींव को कमजोर करते हैं। कांग्रेस सांसद ने जोर देकर कहा कि संसदीय समितियां संसद का ही विस्तार हैं और अक्सर उन्हें लघु संसद के रूप में देखा जाता है। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि कार्यपालिका की विधायिका के प्रति जवाबदेही भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था का एक मूलभूत सिद्धांत है। रमेश ने आगे कहा कि मंत्री की ये टिप्पणियां संसद, संसदीय समितियों, सभी राजनीतिक दलों से चुने गए उनके सदस्यों और स्वयं भारत के संवैधानिक लोकतंत्र के प्रति उनकी गहरी अवमानना को स्पष्ट रूप से दर्शाती हैं। आशीष दुबे / 18 मई 2026