- 11 वे पद्मश्री फड़के संगीत समारोह का सुरमयी समापन धार (ईएमएस)। स्वर संगीत की ही नहीं प्रकृति की भी पहचान है। संगीत का स्वर माधुर्य राजा भोज की धारानगरी में इतना मुखर हुआ कि भीषण गर्मी की तपन भी शीतलता का अहसास करवाने लगी। कलकत्ता की ख्याल गायिका चटर्जी कलकत्ता द्वारा गाया रागश्री का स्वर राज इतना मुखर हुआ कि बार बार तालियां बजती रही। विलंबित तीन ताल में सांझ भई तुम आओं व शरण तेरी प्रभु जी आई ने स्वर के आरोह अवरोध व सरगम का अनूठा प्रभाव निरूपित हुआ। आदि देव महादेव पशुपति भोलेनाथ व सर्वात्मका सर्वेश्ररा ने ऐसा आध्यात्मिक वातावरण बनाया कि सुधी श्रोता झूमने लगे। कलाकार पियाली जी के गुरु अब्दुल रशीदखान सा बंदिश मेरा रोम रोम हर हर बोले ने पद्मश्री फड़के संगीत समारोह को नई ऊंचाइयां प्रदान की। पियाली जी को भोज कला सम्मान से सम्मानित किया गया। तबला संगत अशोक चक्रवर्ती व हारमोनियम संगत धार के दीपक खलतकर ने की। नवोदित प्रस्तुति में युवा गायक उर्मिलेश बैरागी ने राग पट्टदीप में बहुत ही प्रभावी प्रस्तुति प्रदान की। बोल थे एरी मोहे जाने देरी माँ श्याम सुंदर के संगवा व अंतरा लोक लाज ना लागहु मौका जाय रही मै उनके घरवा व तराना प्रस्तुत किया। तबला संगत मयूर गोयल व हारमोनियम संगत दिव्यांशी अहिरवार ने की। संत ने साधा सुर इस संगीत सभा का एक विशेष आकर्षण रहा केरल के अवधूत संत व प भीमसेन जोशी जी शिष्य पूज्य नादा नंद जी ने राग दरबारी कानड़ा ने निबद्ध विनती भजन प्रस्तुत किया। खराब स्वास्थ्य के बाद भी उनकी सरगम व तबला तथा हारमोनियम के साथ जुगलबंदी ने वातावरण को श्रद्धा आलोक से प्रदीप्त कर दिया। हारमोनियम संगत गुरमीत सिंह डंग ने की। संचालन समिति संयोजक डॉ दीपेंद्र शर्मा ने किया। कलाकारों का स्वागत संगीतज्ञ लक्ष्मीकांत जी जोशी, राखी रॉय, डॉ साधना चौहान, अनिल पुजारी, प्रो राजेश पाठक, विभा जैन, जयन्त जोशी, हरिहरदत्त शुक्ल, डॉ प्रदीप रावत ने किया। संचालन समिति ने सभी कलाकारों आयोजन सहयोग के सहयोगियों का आभार व धन्यवाद प्रकट किया। श्रेष्ठ कार्यकर्ता सम्मान अतुल कालभंवर, राकी मक्कड़, गौरव अग्रवाल, वृषाली देशमुख, अर्जुन सिसोदिया को प्रदान किया गया। यह जानकारी मीडिया प्रभारी प्रतीक पाल ने दी। - ईएमएस / 18/05/2026