प्रियंका गांधी वाड्रा, संबित पात्रा और बांसुरी स्वराज जैसे प्रमुख चेहरे शामिल गांधीनगर (ईएमएस)। वन नेशन-वन इलेक्शन (ओएनओई) के महत्वपूर्ण मुद्दे पर गठित संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) ने देशव्यापी परामर्श प्रक्रिया के तहत गुजरात का तीन दिवसीय दौरा शुरू किया है। समिति के 39 सदस्य, जिसमें कांग्रेस की प्रियंका गांधी वाड्रा, भाजपा के संबित पात्रा और बांसुरी स्वराज जैसे प्रमुख चेहरे शामिल हैं, जो कि मंगलवार को गुजरात के गांधीनगर पहुंचे। यह टीम राज्य के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल, विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं और शीर्ष प्रशासनिक अधिकारियों से मुलाकात कर उनके विचार जानेगी। वरिष्ठ वकील पीपी चौधरी की अध्यक्षता वाली संयुक्त संसदीय समिति में कुल 39 सदस्य हैं, जिनमें 27 लोकसभा सांसद और 12 राज्यसभा सांसद शामिल हैं। संसदीय समिति अपनी पहली प्रेसवार्ता शाम 5:30 बजे गांधीनगर की गिफ्ट सिटी में आयोजित करेगी, जहां वे अपने दौरे के उद्देश्यों और अब तक की चर्चाओं पर प्रकाश डाल सकते हैं। गुजरात न्यायिक परिषद ने राज्य प्रशासन के शीर्ष अधिकारियों को महत्वपूर्ण बैठक में उपस्थित रहने का निर्देश दिया है। इसमें मुख्य सचिव मनोज दास, डीजीपी केएनएल राव, वित्त विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव टी नटराजन सहित 10 से अधिक वरिष्ठ सचिव शामिल हैं। माना जा रहा है कि जेपीसी और राज्य के अधिकारियों के बीच तीन से चार घंटे तक गहन चर्चा होगी, जिसमें ओएनओई के विभिन्न पहलुओं और उसके कार्यान्वयन की चुनौतियों पर विचार-विमर्श होगा। समिति ने सभी राजनीतिक दलों के अध्यक्षों को भी 20 मई को अपने विचार प्रस्तुत करने के लिए आमंत्रित किया है। इस मुद्दे पर राजनीतिक दलों ने अपनी राय देनी शुरू कर दी है। भाजपा के मुख्य प्रवक्ता अनिल पटेल ने एक राष्ट्र-एक चुनाव का पूरी तरह से समर्थन करने की बात कही है। वहीं, कांग्रेस प्रवक्ता मनीष दोषी ने कहा कि कांग्रेस इस मुद्दे पर अपने विचार रखेगी और जनता के अधिकारों से जुड़ी सभी चिंताओं को समिति के समक्ष उठाएगी। दरअसल, एक देश-एक चुनाव का तात्पर्य लोकसभा और राज्य विधानसभाओं के चुनाव एक साथ कराने से है। आजादी के बाद 1952, 1957, 1962 और 1967 में यह परंपरा कायम रही, लेकिन 1968 और 1969 में कई विधानसभाओं और फिर दिसंबर 1970 में लोकसभा के समय से पहले भंग होने के कारण यह टूट गई। इस अवधारणा पर विचार करने के लिए पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की अध्यक्षता में एक पैनल का गठन 2 सितंबर, 2023 को किया गया था, जिसने गहन शोध और हितधारकों से चर्चा के बाद 14 मार्च को अपनी रिपोर्ट राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को सौंपी थी। अब संयुक्त संसदीय समिति विभिन्न राज्यों का दौरा कर जमीनी स्तर पर रायशुमारी कर रही है। आशीष दुबे / 19 मई 2026