राज्य
19-May-2026
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संजीवनी क्लीनिकों में पदस्थ चिकित्सकों की डिग्री जांची जाएगी जबलपुर, (ईएमएस)। दमोह पुलिस द्वारा फर्जी डिग्रीधारी डॉक्टरों के अंतरराज्यीय गिरोह का खुलासा किए जाने के बाद अब जबलपुर स्वास्थ्य विभाग में भी हलचल तेज हो गई है। चेरीताल स्थित संजीवनी क्लिनिक से गिरफ्तार फर्जी डॉक्टर अजय मौर्य के मामले में अब विभाग के अधिकारियों की भूमिका पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। इस बीच मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) ने डॉ. नवनीत कोठारी ने जिले में कार्यरत सभी संजीवनी क्लीनिकों में पदस्थ चिकित्सकों के दस्तावेजों की जांच कराए जाने के निर्देश दिए हैं। जबलपुर जिले में अभी 53 संजीवनी क्लीनिक कार्यरत है। जिनमें से शहर सीमा में 51 वे दो सिहोरा में चल रही हैं। स्थानीय शिकायतों और विभागीय सूत्रों के अनुसार, इस मामले में स्वास्थ्य विभाग के एपीएम संदीप नामदेव और अर्बन नोडल अधिकारी डॉ. अमजद खान पर फर्जी डॉक्टर को संरक्षण देने और कमीशनखोरी के आरोप लगाए गए हैं। सवाल उठाया गया है कि संजीवनी चिकित्सकों को ऑफ लाईन वेतन भुगतान कैसे हो रहा था| आरोपी अजय मौर्य बिना वैध मेडिकल डिग्री के मरीजों का इलाज कर रहा था। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि वह कई बार क्लिनिक में मौजूद भी नहीं रहता था, लेकिन इसके बावजूद उसका वेतन जारी होता रहा। यह भी आरोप लगाए गए हैं कि अधिकारियों की मिलीभगत से उसे जबलपुर से चलने वाली विशेष ट्रेनों में वीआईपी ड्यूटी भी दी गई। जनता में नाराजगी … स्थानीय लोगों का कहना है कि गरीबों के इलाज के लिए शुरू की गई संजीवनी क्लिनिक योजना में यदि फर्जी डॉक्टरों की नियुक्ति और भ्रष्टाचार के आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह बेहद गंभीर मामला है। लोगों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो स्वास्थ्य विभाग के खिलाफ आंदोलन किया जाएगा। नोडल अधिकारी को जांच के निर्देश............ सीएमएचओं डॉ. नवनीत कोठारी ने बताया कि उन्होने फर्जी चिकित्सक से जुड़ा मामला प्रकाश में आने के बाद अर्बन नोडल अधिकारी डॉ. अमजद खान को जांच के निर्देश दिए हैं। उल्लेखनीय है कि चेरीताल में पदस्थ चिकित्सक डॉ. अजय मौर्य की गिरफ्तारी के बाद यह सवाल उठ रहे थे कि दस्तावेजों की जांच क्यों नहीं की गई। अर्बन अधिकारी सोमवार को तो यह कह कर पल्ला झाड़ रहे थे कि दस्तावेजों की जांच मुख्यालय स्तर पर भोपाल में हुई थी। लिहाजा उनकी कोई जिम्मेदारी नहीं बनती। लेकिन सीएमएचओ के निर्देश से साफ है कि जिम्मेदारों ने अपनी भूमिका ठीक से नहीं निभाई थी। अभी तो उक्त फर्जी चिकित्सको को ऑफ लाइन वेतन कैसे हो रहा था इस बात की भी जांच होगी। उसे विशेष ट्रेनों में ही क्यों ड्यूटी पर लगाया जाता था। यह भी जांच का विषय होगा| सुनील साहू / मोनिका / 19 मई 2026 / 06.38