- सरकार-संगठन की मैराथन समीक्षा में मंत्रियों को मिला सक्रिय होने का संदेश भोपाल (ईएमएस)। मप्र में भाजपा 2028 में होने वाले विधानसभा चुनाव में पिछली बार की अपेक्षा और बेहतर प्रदर्शन करना चाहती है। इसके लिए सत्ता और संगठन ने तैयारियां शुरू कर दी है। इसी कड़ी में मप्र भाजपा सरकार और संगठन के बीच समन्वय को और मजबूत करने के लिए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और भाजपा नेतृत्व ने मंत्रियों के साथ दो दिन तक लगातार समीक्षा बैठकें कीं। इन बैठकों में मंत्रियों के विभागीय कामकाज, जिलों में सक्रियता, संगठन से तालमेल और जनता के बीच उनकी मौजूदगी को लेकर विस्तार से चर्चा हुई। बैठकों में संगठन ने मंत्रियों को साफ संदेश दिया कि केवल विभागीय कामकाज ही नहीं, बल्कि राजनीतिक और संगठनात्मक सक्रियता भी उतनी ही जरूरी है। खासतौर पर उन विधानसभा सीटों पर फोकस बढ़ाने के निर्देश दिए गए, जहां भाजपा 2023 के चुनाव में हार गई थी या बहुत कम अंतर से जीत दर्ज कर पाई थी। मंत्रियों से कहा गया कि वे अपने गृह जिलों और प्रभार वाले जिलों में लगातार प्रवास करें और पार्टी कार्यकर्ताओं, सांसदों व विधायकों के साथ नियमित संवाद बनाए रखें। जानकारी के मुताबिक बैठक में मंत्रियों से यह भी पूछा गया कि उन्होंने अपने विभागों की समीक्षा कितनी बार की और योजनाओं की जमीनी स्थिति जानने के लिए कितने औचक निरीक्षण किए। मुख्यमंत्री ने स्कूलों, आंगनवाड़ी केंद्रों, स्वास्थ्य संस्थानों और गेहूं खरीदी व्यवस्था जैसी योजनाओं की प्रगति पर विशेष जानकारी ली। मंत्रियों को निर्देश दिए गए कि वे फील्ड विजिट बढ़ाएं और योजनाओं के क्रियान्वयन की वास्तविक स्थिति खुद जाकर देखें। बैठक के दौरान भाजपा संगठन ने मंत्रियों की राजनीतिक सक्रियता पर भी सवाल किए। उनसे पूछा गया कि वे पार्टी कार्यकर्ताओं से कितना संवाद करते हैं और जिलों के दौरों के दौरान कितनी संगठनात्मक बैठकें करते हैं। संगठन ने स्पष्ट किया कि सरकार और पार्टी के बीच बेहतर समन्वय ही आने वाले समय में भाजपा की सबसे बड़ी ताकत होगा। इस दौरान कई मंत्रियों ने अधिकारियों की कार्यशैली को लेकर नाराजगी भी जताई। राजनीतिक जानकार मान रहे हैं कि यह बैठक केवल सामान्य समीक्षा नहीं थी, बल्कि संगठन अब मंत्रियों की सक्रियता, जनता से जुड़ाव और संगठनात्मक पकड़ को लेकर अधिक गंभीर नजर आ रहा है। संगठन के टास्क पर मंत्रियों का रिव्यू प्रदेश में चुनाव के ढाई साल पहले अपने उस दैवदुर्लभ कार्यकर्ता की चिंता में पार्टी जाग गई है। भाजपा ने मध्य प्रदेश के अपने राजनीतिक इतिहास में पहली बार कार्यकर्ता के साथ संगठन के दिए एजेंडे पर मंत्रियों से वन टू वन के साथ उनकी परफार्मेंस रिव्यू किया है। प्रभार के जिलों से लेकर जिला स्तर पर संगठन के कार्डिनेशन तक हर मंत्री से सवाल जवाब हुए। अब कांग्रेस सवाल उठा रही है कि क्या मंत्रियों से भाजपा मुख्यालय में शुरू की गई हेल्पलाइन का रिकार्ड पूछा गया। मंत्रियों को बताना चाहिए कि किस मंत्री के पास कितने कार्यकर्ताओं की शिकायतें आईं और कितनों की समस्या हल हो पाई। पहली बार संगठन का मंत्रियों से वन टू वन भाजपा संगठन में कई प्रयोग हुए हैं। 2003 में उमा भारती की सरकार के दौर में मंत्रियों को एक दिन कार्यालय में बैठने का दिन भी तय किया गया था। लेकिन ये पहली बार है कि ढाई साल की सरकार के बाद मुख्यमंत्री के अलावा संगठन की ओर से मंत्रियों की परफार्मेंस का रिव्यू किया जा रहा है। मंत्रियों को प्रभार के जिले सौंपे जाने के बाद कहा गया था वे नियमित जिलों में दौरा करेंगे। उसकी रिपोर्ट ली गई कि किस मंत्री ने कितने दौरे किए। कितने अंतर से किए। विनोद / 20 मई 26