राष्ट्रीय
20-May-2026


-युवती बोली- मैं पागल नहीं, मर्जी से रह रही हूं, कोर्ट ने की याचिका खारिज बेंगलुरु,(ईएमएस)। कर्नाटक हाईकोर्ट ने एक अहम फैसले में उस 21 साल की सिख युवती की जबरन मानसिक जांच कराने से साफ इनकार कर दिया है, जो अपनी मर्जी से अपने मुस्लिम प्रेमी के साथ रह रही है। कोर्ट ने युवती की मां द्वारा दायर याचिका को खारिज कर दिया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जब कोई बालिग युवती अपनी इच्छा से किसी के साथ रहने का फैसला करती है, तो बिना उसकी सहमति के उसे मानसिक जांच के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक सुनवाई के दौरान कोर्ट के सामने युवती ने कई चौंकाने वाले खुलासे किए। उसने बताया कि पहले भी उसके माता-पिता और आरएसएस के कुछ सदस्यों ने उस पर दबाव डालकर उसके प्रेमी के खिलाफ दुष्कर्म और जबरन धर्म परिवर्तन के झूठे आरोप लगवाए थे। युवती ने कोर्ट को बताया कि उसने जो चिट्ठी लिखी थी, वह दबाव में लिखी थी। उसके माता-पिता ने उसे आरएसएस के लोगों से मिलवाया और उससे दबाब में पत्र लिखवाया। न तो मेरा धर्म परिवर्तन हुआ है और न ही रेप, यह सब झूठ है। उन्होंने मुझे धमकी देकर यह सब करवाया था। याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील ने कोर्ट में दलील दी कि युवती का पहले भी नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ मेंटल हेल्थ एंड न्यूरो साइंसेज में मनोवैज्ञानिक इलाज और थेरेपी चल चुकी है। वकील ने डिस्चार्ज समरी और मेडिकल रिकॉर्ड का हवाला देते हुए एक स्वतंत्र मानसिक मूल्यांकन की मांग की। वकील ने कोर्ट का ध्यान युवती के उन पुराने पत्रों की ओर भी दिलाया जिनमें उसने अपनी जान को खतरा होने और जबरन धर्मांतरण की बात कही थी। मां के सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए युवती ने कोर्ट में कहा कि उसे पागल साबित करने की झूठी कोशिशें की जा रही हैं। वह अपने माता-पिता के साथ वापस जाने को तैयार नहीं हुई। युवती ने कहा जो आरोप लगाए जा रहे हैं कि मैं पागल हूं, वे पूरी तरह से फर्जी हैं। मैं मानसिक रूप से बिल्कुल स्थिर हूं और मुझे समझ नहीं आ रहा कि वे मुझे इस तरह परेशान क्यों कर रहे हैं। बार एंड बेंच की रिपोर्ट के मुताबिक जस्टिस सूरज गोविंदराज और जस्टिस के. मन्मथ राव की वेकेशन बेंच ने युवती के बयानों में उसके आत्मविश्वास को देखते हुए मां के दावों को खारिज कर दिया। पीठ ने कहा कि केवल इसलिए कि आप मांग कर रहे हैं, किसी को मानसिक जांच से क्यों गुजरना चाहिए? इसके अलावा हम इस तरह जबरन कोई आदेश नहीं दे सकते। कोर्ट ने अपने आदेश में साफ किया कि युवती बालिग है और उसने स्पष्ट रूप से कहा है कि वह अपनी मर्जी से अपने मुस्लिम प्रेमी के साथ रह रही है और उसे किसी ने बंधक नहीं बनाया है। कोर्ट ने कहा कि ऐसे में इस याचिका का कोई ठोस आधार नहीं बनता आौर कोर्ट ने याचिका खारिज कर दी। सिराज/ईएमएस 20मई26