राष्ट्रीय
20-May-2026


-वेटलैंड को स्वस्थ और संतुलित रखने में इन कछुओं की अहम भूमिका नई दिल्ली,(ईएमएस)। उत्तर प्रदेश ब्रज तीर्थ विकास परिषद द्वारा विकसित और वन विभाग के संरक्षण में फरह क्षेत्र स्थित जोधपुर झाल वेटलैंड से जैव विविधता के संरक्षण में वन्यजीव विशेषज्ञों और शोधकर्ताओं ने इस वेटलैंड में कछुओं की तीन प्रमुख प्रजातियों की मौजूदगी रिकार्ड की है। इन प्रजातियों में इंडियन फ्लैपशेल टर्टल, स्पाटेड पांड टर्टल और इंडियन रूफ्ड टर्टल शामिल हैं। बायोडायवर्सिटी रिसर्च एंड डवलपमेंट सोसाइटी के ईकोलॉजिस्ट डॉ. केपी सिंह ने बताया कि वेटलैंड को स्वस्थ और संतुलित बनाए रखने में इन कछुओं की भूमिका अहम होती है। ये कछुए जल में मौजूद मृत जीवों, सड़े-गले पौधों को खाकर पानी को साफ रखते हैं। इससे पानी में हानिकारक बैक्टीरिया नहीं पनपते हैं। शैवाल और जलीय खरपतवार को नियंत्रित कर ये पानी में आक्सीजन के स्तर को बनाए रखते हैं। रिपोर्ट के मुताबिक बीआर आंबेडकर विश्वविद्यालय की शोधार्थी निधि यादव के मुताबिक कछुए जलीय कीटों और घोंघों की आबादी को नियंत्रित करते हैं। साथ ही इनके अंडे और छोटे बच्चे बड़े पक्षियों व जीवों का भोजन बनते हैं जिससे खाद्य शृंखला सुचारू रूप से चलती है। इसे हिंदी में सुंदरी कछुआ कहते हैं। इसका वैज्ञानिक नाम लिसेमिस पंक्टाटा है। यह आईयूसीएन की रेड डाटा बुक मे वल्नरेविल प्रजाति के रूप में दर्ज है। इसका हिंदी नाम चित्तीदार कछुआ व कूर्म है। वैज्ञानिक नाम जियोक्लेमिस हैमिल्टोनी है। आईयूसीएन स्थिति में यह एनडेंजर्ड प्रजाति के रूप में दर्ज है। इंडियन रूफ्ड टर्टल इसे हिंदी में तिलहारा या चंदन कछुआ कहते हैं। इसका वैज्ञानिक नाम पंगशुरा टेक्टा है। आईयूसीएन संरक्षण स्थिति वल्नरेविल है। सिराज/ईएमएस 20मई26