राष्ट्रीय
21-May-2026
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-पांच राज्यों के चुनाव नतीजों से मिल रहा बड़ा संकेत -पोस्टल बैलेट के आंकड़ों से राजनीतिक तस्वीर भी हो रही साफ नई दिल्ली,(ईएमएस)। हाल ही में असम, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, पुडुचेरी और केरल में हुए विधानसभा चुनावों के नतीजों ने सिर्फ राजनीतिक दलों की ताकत ही नहीं दिखाई, बल्कि सरकारी कर्मचारियों के वोटिंग पैटर्न को लेकर भी कई अहम संकेत दिए हैं। पोस्टल बैलेट के आधार पर सामने आए आंकड़ों से पता चलता है कि कई राज्यों में सरकारी कर्मचारियों ने सत्ताधारी दलों के खिलाफ मतदान किया, जबकि कुछ जगहों पर उन्होंने सरकार को दोबारा मौका भी दिया। भारत में आमतौर पर मतदान इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) से होता है, लेकिन चुनाव ड्यूटी में लगे सरकारी कर्मचारी, सशस्त्र बलों के जवान, 85 वर्ष से अधिक उम्र के बुजुर्ग और दिव्यांग मतदाता पोस्टल बैलेट के जरिए मतदान करते हैं। इनमें सबसे बड़ी संख्या सरकारी कर्मचारियों की होती है, इसलिए पोस्टल बैलेट को उनके राजनीतिक रुझान का अहम संकेतक माना जाता है। किन राज्यों में कितना पड़ा पोस्टल वोट? पांचों राज्यों में ईवीएम की तुलना में पोस्टल बैलेट की संख्या काफी कम रही, लेकिन दक्षिण भारत के राज्यों (तमिलनाडु, पुडुचेरी और केरल) में इसका प्रतिशत अपेक्षाकृत अधिक दर्ज किया गया। किस पार्टी को मिला सरकारी कर्मचारियों का समर्थन? विश्लेषण के मुताबिक, असम में सरकारी कर्मचारियों ने भाजपा और उसके गठबंधन को मजबूत समर्थन दिया। यहां बीजेपी गठबंधन को 2021 के मुकाबले 5.6 प्रतिशत अधिक पोस्टल वोट मिले। वहीं तमिलनाडु में सरकारी कर्मचारियों ने द्रविण मुनेत्र कड़गम (डीएमके) गठबंधन से सबसे ज्यादा दूरी बनाई। डीएमके गठबंधन को 2021 की तुलना में 24.2 प्रतिशत कम पोस्टल वोट मिले, जिसे कर्मचारियों की नाराजगी का बड़ा संकेत माना जा रहा है। पश्चिम बंगाल में टीएमसी को भी सरकारी कर्मचारियों के वोट में गिरावट का सामना करना पड़ा। ममता बनर्जी की पार्टी को पिछले चुनाव की तुलना में 13.2 प्रतिशत कम पोस्टल वोट मिले। केरल में लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट सरकार को भी सरकारी कर्मचारियों का समर्थन घटता दिखाई दिया। यहां लेफ्ट गठबंधन को पिछली बार की तुलना में 9.6 प्रतिशत कम पोस्टल वोट मिले। हालांकि पुडुचेरी में तस्वीर कुछ अलग रही। यहां एनडीए समर्थित एआईएनआरसी गठबंधन को सरकारी कर्मचारियों के वोटों में मामूली गिरावट जरूर मिली, लेकिन इसके बावजूद गठबंधन सत्ता में वापसी करने में सफल रहा। सत्ता परिवर्तन में कितना अहम रहा कर्मचारी वर्ग? राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सरकारी कर्मचारियों का वोटिंग पैटर्न कई राज्यों में सत्ता परिवर्तन का महत्वपूर्ण कारण बना। खासतौर पर उन राज्यों में जहां कर्मचारियों की नाराजगी बढ़ी, वहां सत्ताधारी दलों को नुकसान उठाना पड़ा। पोस्टल बैलेट भले कुल मतदान का छोटा हिस्सा हो, लेकिन यह प्रशासनिक वर्ग की सोच और सरकारों के प्रति उनके भरोसे का अहम संकेत माना जाता है। ऐसे में इन आंकड़ों को आगामी चुनावों के लिए राजनीतिक दल गंभीरता से देख रहे हैं। हिदायत/ईएमएस 21 मई 2026