क्षेत्रीय
21-May-2026
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रायपुर(ईएमएस)। छत्तीसगढ़ में निजी स्कूलों की बढ़ती मनमानी और अभिभावकों पर बढ़ते आर्थिक बोझ को लेकर राज्य सरकार ने सख्त कदम उठाया है। स्कूल शिक्षा विभाग ने प्रदेशभर में जिला और विकासखंड स्तर पर विशेष निगरानी एवं जांच समितियों के गठन का आदेश जारी किया है। इन समितियों का उद्देश्य निजी स्कूलों द्वारा किताबों, यूनिफॉर्म और अन्य शैक्षणिक सामग्री की खरीद को लेकर की जा रही कथित अनियमितताओं पर निगरानी रखना और शिकायतों का त्वरित समाधान सुनिश्चित करना है। स्कूल शिक्षा विभाग मंत्रालय, नवा रायपुर अटल नगर से सभी जिला कलेक्टरों को जारी निर्देश में कहा गया है कि शासन के संज्ञान में लगातार ऐसी शिकायतें आ रही हैं कि कई निजी स्कूल अभिभावकों को किसी विशेष दुकान या फर्म से ही किताबें, गणवेश और अन्य सामग्री खरीदने के लिए बाध्य कर रहे हैं। आरोप है कि इन निर्धारित दुकानों पर सामग्री बाजार मूल्य से अधिक कीमत पर बेची जा रही है, जिससे पालकों पर अतिरिक्त वित्तीय दबाव पड़ रहा है। विभाग ने माना है कि इस तरह की शिकायतें लगातार मीडिया और अन्य माध्यमों से सामने आ रही थीं। इसे गंभीरता से लेते हुए अब निगरानी व्यवस्था को मजबूत करने का निर्णय लिया गया है, ताकि पालकों को अनावश्यक आर्थिक बोझ से राहत मिल सके और स्कूलों की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता लाई जा सके। राज्य सरकार द्वारा गठित जिला स्तरीय समितियों में कलेक्टर, जिला शिक्षा अधिकारी, सहायक आयुक्त जीएसटी और अन्य संबंधित अधिकारी शामिल रहेंगे। वहीं विकासखंड स्तर पर अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व), विकासखंड शिक्षा अधिकारी तथा जीएसटी इंस्पेक्टर को जिम्मेदारी दी गई है। ये समितियां स्कूलों से जुड़ी शिकायतों की जांच करेंगी और जरूरत पड़ने पर कार्रवाई की अनुशंसा भी करेंगी। केवल किताबों और गणवेश तक ही नहीं, सरकार ने निजी स्कूलों की फीस संरचना को लेकर भी सख्त रुख अपनाया है। आदेश में स्पष्ट किया गया है कि यदि फीस बढ़ोतरी को लेकर शिकायतें सामने आती हैं तो संबंधित अधिकारी स्वतः संज्ञान लेकर कार्रवाई करेंगे। इसके लिए अधिकारियों को छत्तीसगढ़ अशासकीय विद्यालय फीस विनियमन अधिनियम-2020 के तहत निर्धारित प्रावधानों का पालन करने के निर्देश दिए गए हैं। शिक्षा विभाग का मानना है कि इस नई व्यवस्था से निजी स्कूलों की गतिविधियों पर प्रभावी निगरानी संभव होगी और अभिभावकों को राहत मिलेगी। सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता बनी रहे और किसी भी प्रकार की व्यावसायिक मनमानी को रोका जा सके। सत्यप्रकाश(ईएमएस)21 मई 2026