ज़रा हटके
22-May-2026
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-शवों के दांतों की रेडियोकार्बन डेटिंग की, जो वैज्ञानिकों को एक बड़ा सरप्राइज लाओस,(ईएमएस)। लाओस में पुरातत्वविदों को बहुत ही अनोखा और विशाल पत्थर का जार यानी मटका मिला है। इन मटकों को डेथ जार 1 नाम दिया गया है। करीब 12 सौ साल पुराने इस जार की खास बात यह है कि इसके अंदर इंसानी अवशेष बिल्कुल सुरक्षित और अछूते मिले हैं। इतिहास में यह पहली बार है जब किसी ऐसे जार में पुख्ता इंसानी अवशेष मिले हैं। इससे यह साबित होता है कि प्राचीन समय में इनका इस्तेमाल अंतिम संस्कार से जुड़े कामों के लिए किया जाता था। रिसर्चर्स का मानना है कि यह शवों को दफनाने की आखिरी जगह नहीं थी, यहां अंतिम संस्कार की प्रक्रिया का सिर्फ एक हिस्सा होता था। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक इस जार की बनावट लाओस में मिले अन्य जारों से काफी अलग है। इसकी दीवारें बेहद मोटी हैं, इसका निचला हिस्सा चौड़ा है और यह एक बड़े कटोरे जैसा दिखाई देता है। खुदाई में इसके अंदर से पूरे कंकाल नहीं मिले, बल्कि इंसानों के शरीर के कुछ खास हिस्से ही मिले हैं- जैसे, खोपड़ियों को जार के किनारों पर सहेजकर रखा गया था। इसके अलावा हाथ और पैर की हड्डियों को एक साथ गुच्छा बनाकर रखा था। जार के अंदर से कई रंगों के कांच के मोती भी मिले हैं। रिपोर्ट के मुताबिक जब जार के अंदर मिले दांतों की रेडियोकार्बन डेटिंग की गई, तो वैज्ञानिकों को एक बड़ा सरप्राइज मिला। ये अवशेष उम्मीद से कहीं ज्यादा नए निकले। बच्चों और बड़ों की इन हड्डियों को साल 890 से 1160 ईस्वी के बीच अलग-अलग समय पर इस जार में रखा गया था। इससे यह साफ होता है कि यह किसी एक व्यक्ति की कब्र नहीं थी, बल्कि एक ही बड़े परिवार या पूरे समुदाय के लोग अपनी कई पीढ़ियों के शवों के अवशेषों को रखते थे। वे बार-बार इस जगह का इस्तेमाल करते थे। यह पूरी खोज उत्तरी लाओस के जियांग खौआंग पठार पर हुई है, जिसे ‘प्लेन ऑफ जार्स’ कहा जाता है। इस पूरे रहस्यमयी इलाके को पत्थरों को काटकर बनाया गया। यहां 2 हजार से ज्यादा खाली जार बिखरे पड़े हैं। इनकी ऊंचाई 3 से 10 फीट तक है। इन्हें ईसा पूर्व 500 से लेकर 500 ईस्वी के बीच के प्रमुख व्यापारिक रास्तों पर बनाया गया था। हालांकि, आज भी उस प्राचीन सभ्यता और उनके असली मकसद के बारे में बहुत कम जानकारी उपलब्ध है। अब वैज्ञानिक इन हड्डियों की प्राचीन डीएनए जांच करने की तैयारी कर रहे हैं। इससे इन लोगों के आपसी रिश्तों का पता चल सकेगा। सिराज/ईएमएस 22 मई 2026