* नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में शुरू हुए सुधारों ने बदली तस्वीर, अब मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के नेतृत्व में ऊर्जा क्षेत्र में स्थापित हो रहे नए मानक गांधीनगर (ईएमएस)| एक समय बिजली संकट से जूझने वाला गुजरात आज देश में ऊर्जा क्षेत्र का अग्रणी और आत्मनिर्भर राज्य बन चुका है। तत्कालीन मुख्यमंत्री और वर्तमान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में राज्य के बिजली क्षेत्र में व्यापक सुधार किए गए, जिसके परिणामस्वरूप आज गुजरात में 24 घंटे निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित हो सकी है। ग्रामीण क्षेत्रों तक चौबीसों घंटे बिजली पहुंचाने के उद्देश्य से उनके नेतृत्व में ज्योतिग्राम योजना की शुरुआत की गई थी, जो बाद में अन्य राज्यों के लिए भी एक आदर्श मॉडल बनी। वर्तमान में मुख्यमंत्री भूपेन्द्र पटेल के नेतृत्व में गुजरात ऊर्जा क्षेत्र में नए आयाम स्थापित कर रहा है। राज्य सरकार ने गिर सोमनाथ जिले के टिंबडी सबस्टेशन में प्रदेश का पहला अत्याधुनिक स्टैटकॉम स्थापित कर पावर ग्रिड को और अधिक मजबूत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया है। आने वाले समय में राज्य के सात अन्य महत्वपूर्ण सबस्टेशनों पर भी स्टैटकॉम स्थापित करने की योजना बनाई गई है। गुजरात सरकार के ऊर्जा एवं पेट्रोकेमिकल्स विभाग के अंतर्गत कार्यरत गुजरात एनर्जी ट्रांसमिशन कॉर्पोरेशन लिमिटेड (जीईटीसीओ) द्वारा यह आधुनिक स्टैटिक सिंक्रोनस कम्पेन्सेटर यानी स्टैटकॉम स्थापित किया गया है। ‘स्मार्ट वोल्टेज स्टेबलाइजर’ के रूप में पहचानी जाने वाली यह प्रणाली पावर ग्रिड में वोल्टेज स्थिरता बनाए रखने, निर्बाध बिजली प्रवाह सुनिश्चित करने और ग्रिड में होने वाले बदलावों पर तुरंत प्रतिक्रिया देने में सक्षम है। 5 मार्च 2019 को गिर सोमनाथ जिले के 220 केवी टिंबडी सबस्टेशन में ±120 एमवीएआर क्षमता वाला स्टैटकॉम कार्यरत किया गया था। इसके साथ ही जीईटीसीओ भारत की पहली राज्य ट्रांसमिशन यूटिलिटी बन गई, जिसने स्टैटकॉम तकनीक का उपयोग शुरू किया। गुजरात में विशेष रूप से कृषि क्षेत्र में बिजली की मांग अधिक रहने के कारण ग्रिड में वोल्टेज स्थिरता बनाए रखना एक बड़ी चुनौती बन जाता है। पारंपरिक कैपेसिटर और रिएक्टर जैसी प्रणालियां स्थिर सपोर्ट तो देती थीं, लेकिन मांग में लगातार होने वाले उतार-चढ़ाव से निपटने के लिए अधिक उन्नत और गतिशील तकनीक की आवश्यकता महसूस की जा रही थी। टिंबडी सबस्टेशन में सिंगल-सर्किट लिंक और आसपास बिजली उत्पादन स्रोतों की कमी के कारण वोल्टेज में भारी उतार-चढ़ाव देखा जाता था। विशेषकर कृषि क्षेत्र में अधिक मांग के चलते वोल्टेज स्तर 190 केवी से 245 केवी के बीच बना रहता था। पीक समय में यह घटकर 190–200 केवी तक पहुंच जाता था, जबकि मानसून के दौरान मांग कम होने पर यह 235–245 केवी तक बढ़ जाता था। ऐसी स्थिति में वोल्टेज को स्थिर बनाए रखने और निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए एक अत्याधुनिक डायनेमिक सिस्टम की आवश्यकता थी। स्टैटकॉम प्रणाली ग्रिड की स्थिति पर लगातार निगरानी रखती है और रियल-टाइम में त्वरित प्रतिक्रिया देती है। यह जरूरत के अनुसार रिएक्टिव पावर प्रदान या अवशोषित कर वोल्टेज को स्थिर बनाए रखती है। साथ ही यह अलग-अलग लोड की स्थिति में भी ग्रिड को संतुलित रखती है, पावर फैक्टर नियंत्रित करती है, ओवर-वोल्टेज कम करती है और अचानक वोल्टेज गिरने जैसी समस्याओं को रोकती है। इस तकनीक के कारण ट्रांसमिशन सिस्टम पर भार कम हुआ है, बिजली नुकसान में कमी आई है और उपकरणों की सुरक्षा भी बेहतर हुई है। इससे गिर सोमनाथ, जूनागढ़, अमरेली और आसपास के क्षेत्रों में विशेष रूप से किसानों को बड़ा लाभ मिला है। ग्रामीण और औद्योगिक दोनों क्षेत्रों को अब अधिक विश्वसनीय और गुणवत्तापूर्ण बिजली आपूर्ति मिल रही है। टिंबडी में मिली सफलता के बाद गुजरात सरकार ने राज्य के अन्य महत्वपूर्ण स्थानों पर भी स्टैटकॉम स्थापित करने की योजना बनाई है। इसके अंतर्गत थराद, दियोदर, सागपरा, खेरालु, कुकमा और ध्रांगध्रा स्थित 220 केवी सबस्टेशनों तथा आगामी 400 केवी धोलेरा-2 सबस्टेशन पर ±125 एमवीएआर क्षमता वाले स्टैटकॉम स्थापित किए जाने का प्रस्ताव है। यह पहल गुजरात के पावर इंफ्रास्ट्रक्चर को और अधिक मजबूत बनाएगी तथा राज्य के हर क्षेत्र तक गुणवत्तापूर्ण, स्थिर और विश्वसनीय बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। सतीश/22 मई