सिविक सेंटर में भूकंप स्मृति स्तंभ पर दी गई श्रद्धाजंलि जबलपुर, (ईएमएस)। जबलपुर में 22 मई 1997 को आये भूकंप की 29वीं बरसी आज भूकंप जनजागृति दिवस के रूप में मनाई गई। कोरोना काल के बाद भूकंप आपदा दिवस पर होने वालें जनजागरुकता कार्यक्रम बंद हो गए है| इसके पहले सिविक सेंटर प्रेस कम्पलेक्स पर आयोजित एक कार्यक्रम में जनसामान्य को प्राकृतिक आपदाओं की स्थिति में राहत एवं बचाव कार्यों की जानकारी दी जाती रही और राहत व बचाव कार्यों का जीवंत प्रदर्शन भी किया जाता था। सिविक सेंटर में बने भूकंप स्मृति स्तंभ में कुछ लोगों ने आकर जरुर श्रद्धाजंलि अर्पित की| यहां उल्लेखनीय है कि आज से 29 साल पूर्व 22 मई 1997 की वह काली रात कोई नहीं भूल पाता, जब लोग गहरी नींद में सो रहे थे तब धरती हिली और पल भर में सब कुछ धराशायी हो गया था। इस विनाशकारी भूकंप में 22 लोगों की जाने गई थी और कई हजार मकान धराशायी हो गये थे। 6.5 रियेक्टर की तीव्रता वाले भूकंप ने जबलपुर की जमीन हिलाकर रख दी थी। मई के महीने में भीषण गर्मी होने की वजह से अधिकांश लोग घरों के बाहर सो रहे थे। इस कारण भगदड़ का माहौल बन गया था। भूकंप का अभिकेन्द्र बरेला रोड पर कोसमघाट के पास था। जहां सैकड़ों गरीबों की बस्तियां उजड़ गयी थी। 22 मई 1997 को सुबह 4 बजकर 22 मिनिट पर आये इस भूकंप की याद ताजा होते ही लोगों की रूह कांप जाती ह भूकंप वेधशाला भी नहीं बन सकी....... भूकंप संवेदी जोन टीम में शामिल जबलपुर में एक अत्याधुनिक भूकंपमापी वेधशाला की आवश्यकता महसूस की गई थी लेकिन उस वक्त बरगी के पास आनन-फानन में एक वेधशाला स्थापित की गई, जो बाद में बंद हो गयी। आज स्थिति यह है कि भूगर्भीय हलचल के लिए दिल्ली वेधशाला पर निर्भर होना पड़ता है। आपदा प्रबंधन का आज भी नहीं कोई इंतजाम....... भूकंप के समय आपदा प्रबंधन को लेकर जो कड़वे अनुभव सामने आये थे, उस पर खूब चिल्लपों मची थी। लेकिन समय के साथ-साथ सब कुछ ठंडा हो गया। आज शहर में आपदा प्रबंधन के नाम पर कुछ भी नहीं है। न अस्पतालों में व्यापक व्यवस्थाएं है और न ही प्रशिक्षित नागरिक वार्डन कलेक्ट्रेट में आपदा प्रबंधन शाखा खोली गई थी लेकिन अब सिर्फ इस शाखा में भी कोई जागरुकता के कार्यक्रम नहीं होते| सुनील साहू / मोनिका / 22 मई 2026 / 06.21