अंतर्राष्ट्रीय
23-May-2026
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वॉशिंगटन(ईएमएस)। ईरान और इजरायल के बीच जारी भीषण संघर्ष के दौरान इजरायल का बचाव करने के लिए अमेरिका ने एक ऐसा बड़ा दांव चला है, जिसने अब खुद उसकी अपनी सैन्य तैयारियों और हथियारों के खजाने पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस रक्षा अभियान के दौरान अमेरिका ने अपनी सबसे एडवांस मिसाइल डिफेंस इंटरसेप्टर प्रणालियों का इतनी बड़ी संख्या में इस्तेमाल किया कि पेंटागन के स्टॉक पर अभूतपूर्व दबाव बढ़ गया है। एक हालिया अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका ने इजरायल की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अपने बेड़े से 200 से अधिक बेहद आधुनिक थाड इंटरसेप्टर दाग दिए। इसके साथ ही, पूर्वी भूमध्यसागर में तैनात अमेरिकी नौसैनिक युद्धपोतों से 100 से अधिक एसएम-3 और एसएम-6 इंटरसेप्टर भी लॉन्च किए गए। चौंकाने वाली बात यह है कि खुद इजरायल ने अपनी रक्षा में इतनी बड़ी संख्या में मिसाइलें नहीं दागीं, जितनी अमेरिका ने उसके लिए चलाईं। सैन्य अधिकारियों का दावा है कि इस पूरे रक्षात्मक ऑपरेशन में अमेरिकी रक्षा मंत्रालय यानी पेंटागन के इंटरसेप्टर स्टॉक का लगभग आधा हिस्सा पूरी तरह खर्च हो चुका है। आंकड़ों की तुलना करें तो इस हवाई जंग में इजरायल ने अपने एरो सिस्टम से 100 से कम इंटरसेप्टर और डेविड्स स्लिंग प्रणाली से करीब 90 इंटरसेप्टर का ही इस्तेमाल किया। इस प्रकार अमेरिका ने इजरायल की तुलना में लगभग 120 अधिक इंटरसेप्टर दागे और ईरान द्वारा दागी गई दोगुनी मिसाइलों को हवा में ही मार गिराया। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि सार्वजनिक तौर पर नैरेटिव चाहे जो भी रहा हो, लेकिन हकीकत में ईरान के मिसाइल हमलों का सबसे बड़ा बोझ अमेरिकी सेना ने अपने कंधों पर उठाया, जबकि इजरायल ने चालाकी से अपना खुद का स्टॉक बचा लिया। इस भारी खर्च के बाद अमेरिका के पास अब महज 200 के करीब थाड इंटरसेप्टर ही बचे होने की आशंका है। सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि अमेरिकी कंपनियों की उत्पादन क्षमता इतनी तेज नहीं है कि वे इतनी जल्दी इस खाली हो चुके स्टॉक को दोबारा भर सकें। इस स्थिति ने अब जापान और दक्षिण कोरिया जैसे अमेरिकी सहयोगियों की धड़कनें बढ़ा दी हैं। ये देश अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा और हवाई क्षेत्र की रक्षा के लिए अमेरिकी मिसाइल डिफेंस सिस्टम पर पूरी तरह निर्भर हैं। ऐसे में यदि भविष्य में चीन या उत्तर कोरिया की तरफ से कोई नया सैन्य संकट खड़ा होता है, तो अमेरिका के लिए उनसे निपटना बेहद मुश्किल हो जाएगा। साथ ही, यदि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान के खिलाफ फिर से कोई नई सैन्य कार्रवाई शुरू करते हैं, तो हथियारों का यह संकट और गहरा सकता है। हालांकि, पेंटागन ने इस पर सफाई देते हुए कहा है कि दोनों देशों ने मिलकर संतुलित तरीके से इस रक्षा का बोझ उठाया है। वीरेंद्र/ईएमएस 23 मई 2026