वाशिंगटन (ईएमएस)। मध्य पूर्व में भीषण तनाव के बाद, वैश्विक राजनीति से चौंकाने वाली और राहत भरी खबर आई है। लंबे समय से धुर विरोधी रहे अमेरिका और ईरान के बीच अंतिम समझौते के मसौदे पर अप्रत्यक्ष रूप से चर्चा जारी है। रिपोर्ट के अनुसार, दोनों देश ओमान और अन्य मध्यस्थों के जरिए लगातार संदेशों और समझौतों के ड्राफ्ट का आदान-प्रदान कर रहे हैं। इसकी पुष्टि तब और मजबूत हुई जब ईरान के एक शीर्ष अधिकारी ने बताया कि दोनों पक्षों के वार्ताकार एक ऐतिहासिक सहमति पर पहुंचने के बेहद करीब हैं। हालांकि, कूटनीतिक जानकारों का मानना है कि बातचीत बहुत आगे बढ़ चुकी है, लेकिन अंतिम समझौते पर हस्ताक्षर होता या नहीं, यह कहना अभी जल्दबाजी होगी। इस बीच, पाकिस्तान के वरिष्ठ अधिकारी भी विशेष मध्यस्थता मिशन के तहत ईरान में हैं, जहां वे स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के समुद्री मार्ग को सुरक्षित और खुला रखने पर चर्चा कर रहे हैं। इस बेहद गोपनीय और अचानक शुरू हुई बातचीत के पीछे एक ऐसा सैन्य कारण सामने आया है जिसने अमेरिकी सुरक्षा गुट में हड़कंप मचा दिया है। अमेरिकी अखबार की रिपोर्ट के मुताबिक, इजरायल-ईरान युद्ध में इजरायल की रक्षा करते-करते अमेरिका का खुद का आधुनिक मिसाइल डिफेंस इन्वेंट्री (हथियारों का स्टॉक) करीब खाली होने की कगार पर पहुंच गया है। अमेरिकी अधिकारियों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि पेंटागन ने इजरायल को ईरानी मिसाइलों से बचाने के लिए अपनी क्षमता से बाहर जाकर अंधाधुंध गोला-बारूद और इंटरसेप्टर मिसाइलें दागी हैं, जिससे खुद अमेरिका पर गंभीर संकट खड़ा हो गया है। आंकड़ों के अनुसार, अमेरिका ने इजरायल की रक्षा में 200 से अधिक थाडा और पूर्वी भूमध्य सागर में तैनात युद्धपोतों से 100 से अधिक एसएम-3 व एसएम-6 इंटरसेप्टर दागे। इस भारी गोलाबारी के कारण पेंटागन के पास मौजूद कुल मिसाइल स्टॉक का करीब आधा हिस्सा खत्म हो चुका है। चौंकाने वाली बात यह है कि खुद इजरायल ने अपने बचाव में अपनी एरो मिसाइलों के 100 से भी कम और डेविड्स स्लिंग के केवल 90 इंटरसेप्टर फायर किए, यानी इजरायल से कहीं ज्यादा अमेरिकी हथियारों का नुकसान हुआ, जिसने वाशिंगटन को ईरान के साथ टेबल पर आने के लिए मजबूर किया है। भले ही अमेरिका कूटनीतिक समझौते की राह पर बढ़ रहा है, लेकिन ट्रंप का तेहरान के प्रति रुख अभी भी बेहद आक्रामक है। वाशिंगटन में मीडिया से बात करते हुए ट्रंप ने कहा कि इस समझौते के तहत ईरान को परमाणु हथियार बनाने की अनुमति कतई नहीं दी जाएगी। उन्होंने कड़े लहजे में कहा कि ईरान के पास जो भी एनरिच यूरेनियम है, वह अपने पास नहीं रख पाएगा, अमेरिका उस यूरेनियम को जब्त कर लेगा और संभवतः नष्ट कर देगा। ट्रंप ने बातचीत को अपनी एक बड़ी जीत के रूप में पेश करते हुए अमेरिकी जनता को आर्थिक मोर्चे पर बड़ी राहत का वादा किया। उन्होंने कहा कि ईरान का यह विवाद जल्द समाप्त होगा, जिससे वैश्विक बाजार स्थिर होगा और देश में पेट्रोल-डीजल की कीमतें बहुत नीचे गिर जाएंगी। यह बयान मिडिल ईस्ट में शांति लाकर अमेरिकी अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने की उनकी मंशा को दिखाता है। वर्तमान में चल रही यह वार्ता एक नाजुक मोड़ पर है। ईरान जहां अमेरिकी आर्थिक प्रतिबंधों और इजरायली हमलों से पस्त हो चुका है और प्रतिबंधों से राहत चाहता है, वहीं अमेरिका यूक्रेन, ताइवान और अब मिडिल ईस्ट में त्रिकोणीय सैन्य दबाव झेलने के बाद अपने सैन्य संसाधनों को पुनः सुरक्षित करना चाहता है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज जैसे रणनीतिक जलमार्ग पर व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा भी इस डील का एक बड़ा हिस्सा है, क्योंकि दुनिया का एक-तिहाई तेल इसी रास्ते से गुजरता है। यदि यह समझौता सफल रहता है, तब इस दशक की सबसे बड़ी कूटनीतिक कामयाबी माना जाएगा। हालांकि, इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू इस डील को लेकर क्या रुख अपनाते हैं, यह देखना अभी बाकी है, क्योंकि इजरायल हमेशा से ईरान के साथ किसी भी तरह के समझौते का विरोध करता रहा है। लेकिन फिलहाल, वॉशिंगटन और तेहरान के बीच बढ़ रही यह नजदीकी इस बात का साफ संकेत है कि दोनों पक्ष युद्ध की तबाही से थक चुके हैं और अब बातचीत के जरिए हल निकालने की आखिरी कोशिश में जुटे हैं। आशीष/ईएमएस 23 मई 2026