- यह पिछले साल के लाभांश से 7 फीसदी अधिक नई दिल्ली (ईएमएस)। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए केंद्र सरकार को 2.87 लाख करोड़ रुपए का रिकॉर्ड अधिशेष हस्तांतरित करने का फैसला किया है। यह राशि पिछले साल के 2.69 लाख करोड़ रुपए के लाभांश से लगभग 7 प्रतिशत अधिक है। केंद्रीय बैंक ने हालांकि आकस्मिक जोखिम बफर (सीआरबी) को बैलेंस शीट के 7.5 प्रतिशत से घटाकर 6.5 प्रतिशत तक करने का निर्णय लिया है, पर उच्च जोखिम प्रावधानों के कारण अर्थशास्त्रियों ने इस हस्तांतरण को बाजार की उम्मीदों से थोड़ा कम बताया है। आरबीआई के सेंट्रल बोर्ड ने अपनी 623वीं बैठक में यह निर्णय लिया। इस रिकॉर्ड हस्तांतरण का एक प्रमुख कारण विदेशी मुद्रा भंडार की बिक्री से आरबीआई की आय में वृद्धि है। वित्त वर्ष 2026 में आरबीआई की बैलेंस शीट 20.61 प्रतिशत बढ़कर 91.97 लाख करोड़ रुपए हो गई, जिससे सकल आय में 26.42 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। केंद्रीय बोर्ड ने वित्त वर्ष 2026 के लिए सीआरबी में 1.09 लाख करोड़ रुपए का बड़ा हस्तांतरण करने का भी निर्णय लिया, जो पिछले वित्त वर्ष के 44,861.70 करोड़ रुपए से काफी अधिक है। संशोधित आर्थिक पूंजी ढांचा (ईसीएफ) सीआरबी को बैलेंस शीट के 4.5 प्रतिशत से 7.5 प्रतिशत के बीच बनाए रखने का लचीलापन प्रदान करता है। अर्थशास्त्रियों ने कहा कि सीआरबी अनुपात में कमी के बावजूद, उच्च प्रावधान आवश्यकताओं के कारण अधिशेष बाजार की उम्मीदों से थोड़ा कम रहा। आईडीएफसी फर्स्ट बैंक की एक अर्थशास्त्री ने कहा कि आरबीआई का अधिशेष हस्तांतरण बाजार अनुमान से इसलिए कम रहा क्योंकि प्रावधान उम्मीद से अधिक रहा। विशेषज्ञों का मानना है कि उच्च सब्सिडी और कम कर संग्रह के कारण सरकार की राजकोषीय स्थिति पर दबाव बना रह सकता है। उर्वरक और ईंधन सब्सिडी की उच्च आवश्यकता और कम कर संग्रह तथा तेल कंपनियों से कम लाभांश के कारण राजकोषीय दबाव बना रह सकता है। हालांकि, इंडिया रेटिंग्स ऐंड रिसर्च के एक अर्थशास्त्री ने कहा कि यह उच्च हस्तांतरण भू-राजनीतिक स्थिति के कारण राजकोषीय घाटे पर कुछ दबाव कम करेगा। सतीश मोरे/23मई ---