मुंबई, (ईएमएस)। मुंबई की एक सत्र अदालत ने बांद्रा स्थित डॉ. बलिराम हीरे कॉलेज ऑफ आर्किटेक्चर के प्रिंसिपल सुनील मगदूम की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी। उन पर छात्रों को गैर-मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालयों के जरिए फर्जी व्यावसायिक डिग्री देने और धोखाधड़ी करने का आरोप है। अदालत ने कहा कि प्रथम दृष्टया यह साफ है कि आरोपी को छात्रों के साथ हुई धोखाधड़ी की जानकारी थी और इस मामले में अन्य लोगों के शामिल होने की भी संभावना है। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश एम. बी. ओझा ने कहा कि मामले की सच्चाई सामने लाने के लिए आरोपी से हिरासत में पूछताछ जरूरी है। शिकायतकर्ता निधि रैत ने आरोप लगाया कि उन्हें बैचलर ऑफ वोकेशन (इंटीरियर) कोर्स में दाखिला लेने के लिए यह कहकर प्रेरित किया गया कि कॉलेज का संबंध संगाई अंतर्राष्ट्रीय विश्वविद्यालय से है, जो यूजीसी से मान्यता प्राप्त है। साथ ही इंटर्नशिप और प्लेसमेंट का भी वादा किया गया था। छात्रों ने वर्ष 2022-23 और 2023-24 के लिए प्रति वर्ष 80 हजार रुपये फीस और परीक्षा शुल्क जमा किया। बाद में यूजीसी की नोटिस से पता चला कि यह विश्वविद्यालय “स्वयंभू और गैर-मान्यता प्राप्त” है तथा इसकी डिग्रियां उच्च शिक्षा और नौकरी के लिए मान्य नहीं हैं। शिकायत में यह भी कहा गया कि कॉलेज ने छात्रों को सही जानकारी दिए बिना लगातार दाखिले जारी रखे, वादा की गई इंटर्नशिप नहीं दी और परीक्षा व परिणाम में देरी की। बाद में कॉलेज ने सिक्किम अंतर्राष्ट्रीय विश्वविद्यालय से संबद्धता होने का दावा किया, जिसे छात्रों ने जांच में गैर-मान्यता प्राप्त पाया। छात्रों ने आरोप लगाया कि मार्कशीट में भी कई गड़बड़ियां थीं, जिनमें सील और हस्ताक्षर की कमी, अलग-अलग प्रारूप और अंकों में विसंगतियां शामिल हैं। वहीं, प्रिंसिपल सुनील मगदूम ने अदालत में कहा कि एफआईआर झूठी और बेबुनियाद है। उनका दावा था कि जब उन्हें पता चला कि विश्वविद्यालय यूजीसी से मान्यता प्राप्त नहीं है, तब कॉलेज ने छात्रों के भविष्य को बचाने के लिए दूसरे विश्वविद्यालयों से संपर्क किया। उन्होंने यह भी कहा कि मार्कशीट विश्वविद्यालय द्वारा जारी की गई थीं, न कि उनके द्वारा। जांच अधिकारी ने अदालत को बताया कि यह पता लगाने के लिए हिरासत में पूछताछ जरूरी है कि फर्जी दस्तावेज कैसे बनाए गए, कितना पैसा कमाया गया और इस पूरे घोटाले में कौन-कौन शामिल था। साथ ही आशंका जताई गई कि आरोपी को जमानत मिलने पर सबूतों से छेड़छाड़ हो सकती है। संजय/संतोष झा- २३ मई/२०२६/ईएमएस