राज्य
23-May-2026
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मुंबई, (ईएमएस)। बॉम्बे हाईकोर्ट की अवकाशकालीन पीठ ने महाराष्ट्र के 500 से अधिक निजी गैर-अनुदानित स्कूलों को बड़ी राहत देते हुए राज्य सरकार द्वारा शिक्षकों और कर्मचारियों को अनिवार्य जनगणना ड्यूटी में लगाने के आदेश पर रोक लगा दी। न्यायमूर्ति गौतम अखंड और न्यायमूर्ति संदीप पाटिल की खंडपीठ ने कहा कि जनगणना अधिनियम के तहत बनाए गए नियमों की ऐसी व्याख्या नहीं की जा सकती, जिससे निजी गैर-अनुदानित स्कूलों के शिक्षकों को जबरन जनगणना कार्य में लगाया जाए। अदालत ने स्पष्ट किया कि नियम 5(5) अपने आप में ऐसा कोई स्वतंत्र अधिकार नहीं देता। हाईकोर्ट ने राज्य सरकार, जनगणना संचालन निदेशक तथा मुंबई, नवी मुंबई, पुणे, नागपुर और पिंपरी-चिंचवड़ नगर निगमों के अधिकारियों को नोटिस जारी कर चार सप्ताह के भीतर जवाब मांगा है। दरअसल यह याचिकाएं गैर-सहायता प्राप्त विद्यालय मंच समेत कई निजी स्कूल संगठनों ने दायर की थीं। इन संगठनों का कहना था कि जनगणना ड्यूटी नहीं करने पर शिक्षकों को कारण बताओ नोटिस और एफआईआर की धमकी दी जा रही थी। याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता वेंकटेश धोंड ने अदालत में दलील दी कि केवल स्थानीय निकायों के कर्मचारियों को जनगणना कार्य के लिए उपलब्ध कराने का प्रावधान है, निजी गैर-अनुदानित स्कूलों के शिक्षकों को नहीं। वहीं राज्य सरकार और जनगणना विभाग की ओर से कहा गया कि जनगणना अधिनियम और नियमों के तहत शिक्षकों व कर्मचारियों को गणनाकर्मी नियुक्त करने का अधिकार है। सरकार ने यह भी तर्क दिया कि स्कूलों की छुट्टियों के दौरान यह कार्य कराया जा रहा है, इसलिए पढ़ाई प्रभावित नहीं होगी। हालांकि हाईकोर्ट ने राज्य की इस दलील को खारिज करते हुए कहा कि बड़ी संख्या में शिक्षकों को जनगणना ड्यूटी में लगाने से स्कूलों की नियमित शैक्षणिक गतिविधियां प्रभावित होंगी और छात्रों के निर्बाध शिक्षा के अधिकार पर असर पड़ेगा। अदालत ने कहा कि जनगणना का कार्य सरकारी तंत्र, स्थानीय निकायों या अनुदानित संस्थानों के माध्यम से भी कराया जा सकता है। मामले की अगली सुनवाई 31 जुलाई को होगी। संजय/संतोष झा- २३ मई/२०२६/ईएमएस