राष्ट्रीय
23-May-2026
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यह वह संस्था है जिसके विदेशी चंदे पर भारत सरकार ने प्रतिबंध लगा दिया कोलकाता,(ईएमएस)। अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रूबियो शनिवार को अपनी चार दिवसीय यात्रा की शुरुआत में कोलकाता पहुंचे। पिछले 14 सालों में किसी अमेरिकी विदेश मंत्री का कोलकाता का यह पहला दौरा है। इससे पहले 2012 में हिलेरी क्लिंटन यहां आई थीं। कोलकाता पहुंचते ही रूबियो और उनकी पत्नी जेनेट डी रूबियो ने मध्य कोलकाता स्थित मदर हाउस का दौरा किया, जो सेंट टेरेसा की मिशनरीज ऑफ चैरिटी का वैश्विक मुख्यालय है। उन्होंने वहां अधिकारियों से बात की और चिल्ड्रन्स होम भी गए। मदर टेरेसा द्वारा स्थापित मिशनरीज ऑफ चैरिटी एक कैथोलिक धार्मिक संस्था है, जो दुनियाभर में गरीबों, बीमारों और बेसहारा लोगों की निस्वार्थ सेवा के लिए जानी जाती है। बता दें मिशनरीज ऑफ चैरिटी वही संस्था है जिसके विदेशी चंदे पर भारत सरकार ने प्रतिबंध लगा दिया था। बता दें विदेशी चंदा विनियमन अधिनियम (एफसीआरए) वह कानून है जिसके तहत भारत में काम करने वाले एनजीओ और चैरिटी संस्थानों को विदेशी फंड प्राप्त करने की अनुमति मिलती है। भारत सरकार ने 2021 में प्रतिकूल इनपुट्स का हवाला देते हुए मदर टेरेसा की मिशनरीज ऑफ चैरिटी के एफसीआरए लाइसेंस के नवीनीकरण को रोक दिया था। हालांकि, बाद में जरुरी दस्तावेज जमा करने पर इसे बहाल कर दिया था। इस एफसीआरए लाइसेंस का मुद्दा 2021 में पश्चिम बंगाल की तत्कालीन सीएम ममता बनर्जी ने उठाया था। उन्होंने आरोप लगाया था कि केंद्र सरकार ने इस संगठन से जुड़े बैंक खातों को फ्रीज कर दिया है। संस्था के 22,000 मरीज और कर्मचारी बिना भोजन और दवाइयों के रह गए हैं। हालांकि कानून सबसे ऊपर है, लेकिन मानवीय प्रयासों के साथ कोई समझौता नहीं होना चाहिए। सीपीआई-एम के राज्य सचिव सूर्यकांत मिश्रा ने भी इसी तरह के दावे किए थे। उन्होंने दावा किया था कि बैंक खातों के साथ-साथ सरकार ने मिशनरीज ऑफ चैरिटी के पास मौजूद नकद राशि को भी फ्रीज कर दिया है। गृह मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि उसने ऐसा कोई कदम नहीं उठाया है। यह मिशनरीज ऑफ चैरिटी के लोगों ने ही एसबीआई को अनुरोध भेजा था, जिसमें उन्होंने बैंक से अपने खाते फ्रीज करने की गुजारिश की थी। रूबियो के भारत दौरे से ठीक पहले, अमेरिकी कांग्रेसमैन (सांसद) क्रिस स्मिथ ने वाशिंगटन एग्जामिनर में 21 मई, 2026 को एक ऑप-एड लिखा है। इसमें उन्होंने विदेश मंत्री रूबियो से पीएम मोदी और विदेश मंत्री एस जयशंकर के साथ होने वाली बैठकों में इस मुद्दे को मजबूती से उठाने की अपील की है। उन्होंने 2022 में मिशनरीज ऑफ चैरिटी पर हुई कार्रवाई का उदाहरण देते हुए कहा कि अगर भारत सरकार का नया एफसीआरए कानून लागू होता है, तो मामूली तकनीकी या एकाउंटिंग गलती के कारण भी पूरी की पूरी संस्था की संपत्ति स्थायी रूप से जब्त की जा सकती है। उनका मानना है कि यदि भारत सरकार इस प्रस्तावित कानून को वापस नहीं लेती है, तो इससे अमेरिका और भारत के ऐतिहासिक और रणनीतिक संबंधों को स्थायी नुकसान पहुंच सकता है। बता दें मार्को रूबियो अपनी इस यात्रा में कोलकाता के बाद आगरा, जयपुर और नई दिल्ली भी जाएंगे। 26 मई को वे नई दिल्ली में होने वाली क्वाड देशों के विदेश मंत्रियों की अहम बैठक में हिस्सा लेंगे और भारतीय नेतृत्व के साथ रक्षा, तकनीक और ऊर्जा सुरक्षा पर भी विस्तृत चर्चा करेंगे। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या रूबियो अपनी आधिकारिक बैठकों में एफसीआरए कानून और विदेशी फंडिंग से जुड़े इस संवेदनशील मुद्दे को उठाते हैं या नहीं। सिराज/ईएमएस 23मई26