23-May-2026
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- पुनर्वास और सुधार की दिशा में प्रेरणादायक पहल, जेल प्रशासन के सहयोग और शिक्षा से बदल रही है बंदियों की जिंदगी अहमदाबाद (ईएमएस)| गुजरात में जेल की ऊँची दीवारों और लोहे की सलाखों के पीछे, जहाँ सामान्यतः अंधकार, पछतावा और अकेलेपन की छवि उभरती है, वहीं राज्य सरकार के प्रयासों से अब एक नई उम्मीद की किरण दिखाई दे रही है। नायब मुख्यमंत्री हर्ष संघवी के नेतृत्व और राज्य पुलिस महानिदेशक डॉ. के. एल. एन. राव के मार्गदर्शन में राज्य की जेलों में शिक्षा के माध्यम से पुनर्वास का एक प्रेरणादायक मॉडल सामने आया है। इस वर्ष राज्य की विभिन्न जेलों में बंद कुल 44 बंदियों ने माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की 10वीं और 12वीं की परीक्षा सफलतापूर्वक उत्तीर्ण की है। इनमें 10वीं कक्षा के 22 और 12वीं कक्षा के 22 बंदी शामिल हैं। यह उपलब्धि जेल प्रशासन की निरंतर मेहनत, मार्गदर्शन और मानवीय दृष्टिकोण का परिणाम मानी जा रही है, जिसने बंदियों के जीवन में शिक्षा की रोशनी फैलाई है। जेल विभाग द्वारा इन बंदियों को परीक्षा फॉर्म भरवाने से लेकर किताबें, अध्ययन सामग्री और विषयवार कक्षाओं की पूरी सुविधा उपलब्ध कराई गई। इतना ही नहीं, जेल परिसर में ही परीक्षा केंद्र की व्यवस्था की गई, जिससे बंदियों को एक अनुकूल और सुरक्षित वातावरण में परीक्षा देने का अवसर मिला। एक बंदी ने अपनी भावनाएँ व्यक्त करते हुए कहा कि सजा के बाद उसे लगा था कि जीवन समाप्त हो गया है, लेकिन जेल में चल रहे रेडियो प्रिजन कार्यक्रम, वेल्फेयर ऑफिस और अधिकारियों की प्रेरणा ने उसे फिर से पढ़ाई की ओर मोड़ दिया। आज परीक्षा में सफलता मिलने पर उसे वर्षों बाद फिर से जीने का अहसास हुआ है। एक अन्य बंदी ने बताया कि पारिवारिक आर्थिक स्थिति के कारण उसकी पढ़ाई बीच में ही छूट गई थी, जिसके बाद वह मानसिक तनाव में आ गया था। लेकिन जेल अधिकारियों की काउंसलिंग और प्रोत्साहन से उसने फिर से पढ़ाई शुरू की और आज सफलता हासिल की है। 12वीं में उत्तीर्ण एक बंदी ने कहा कि जेल में रहते हुए भी उसके सपने जीवित हैं। वह सप्ताह में दो दिन संगीत कक्षाओं में भाग लेता है और बाहर निकलकर गायक बनने की इच्छा रखता है। जेल प्रशासन द्वारा बंदियों के लिए आधुनिक पुस्तकालय की भी व्यवस्था की गई है, जिसमें पुस्तकों के साथ-साथ ऑडियो बुक्स की सुविधा भी उपलब्ध है। ये संसाधन बंदियों में सकारात्मक सोच और आत्मविश्वास विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। इसके अलावा, जेल विभाग द्वारा नियमित रूप से विशेष व्याख्यानों का आयोजन किया जाता है, जिसमें स्कूल और कॉलेज के शिक्षक तथा विषय विशेषज्ञ जेल के भीतर आकर बंदियों का मार्गदर्शन करते हैं। यह 44 बंदियों की सफलता केवल एक परीक्षा परिणाम नहीं है, बल्कि शिक्षा के माध्यम से जीवन में बदलाव की एक जीवंत मिसाल है। यह प्रयास समाज को पुनर्वास की दिशा में एक संवेदनशील और प्रेरणादायक संदेश देता है। राज्य के पुलिस महानिदेशक डॉ. के. एल. एन. राव ने इस उपलब्धि पर सभी सफल बंदियों को बधाई दी और कहा कि उन्हें जेल विभाग द्वारा प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया जाएगा। साथ ही जेल में बंदियों के प्रतिभाशाली बच्चों को भी प्रोत्साहित किया जाएगा। - 23 मई