राष्ट्रीय
23-May-2026


नई दिल्ली (ईएमएस)। पश्चिम बंगाल की राजनीति में इन दिनों भारतीय जनता पार्टी और तृणमूल कांग्रेस के बीच बयानबाजी तेज हो गई है। बीजेपी की ओर से लगातार यह कहा जा रहा है कि तृणमूल कांग्रेस के नेताओं के लिए पार्टी के दरवाजे बंद हैं, लेकिन राजनीतिक गलियारों में इस बात को लेकर चर्चा जारी है कि यह स्थिति कब तक बनी रहेगी। हालिया पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने बड़ी जीत दर्ज करते हुए तृणमूल कांग्रेस के 15 साल पुराने शासन को समाप्त कर दिया। इसके बाद राज्य की राजनीति में लगातार नए समीकरण बनने की अटकलें लगाई जा रही हैं। बीजेपी नेता सामिक भट्टाचार्य और दिलीप घोष जैसे नेताओं ने सार्वजनिक रूप से कहा है कि पार्टी अब पुराने अनुभवों से सीख चुकी है और टीएमसी से आने वाले नेताओं को लेकर सतर्क रहेगी। हालांकि राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पश्चिम बंगाल की राजनीति में दल-बदल कोई नई बात नहीं है। इससे पहले भी कई बड़े टीएमसी नेता बीजेपी में शामिल हो चुके हैं, जिनमें शुभेंदु अधिकारी सबसे बड़ा नाम रहे हैं। वर्तमान में शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व में बीजेपी सरकार बनने के बाद राज्य में राजनीतिक गतिविधियां और तेज हो गई हैं। वहीं तृणमूल कांग्रेस सुप्रीमो ममता बनर्जी ने चुनावी हार के बावजूद कार्यकर्ताओं से संघर्ष जारी रखने की अपील की है। पार्टी अंदरूनी समीक्षा बैठकों के जरिए हार के कारणों का विश्लेषण कर रही है। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि आने वाले महीनों में यदि टीएमसी के कुछ नेता बीजेपी की ओर रुख करते हैं, तो पार्टी का मौजूदा रुख बदल भी सकता है। फिलहाल दोनों दलों के बीच सियासी बयानबाजी चरम पर है और बंगाल की राजनीति में आगे कई नए घटनाक्रम देखने को मिल सकते हैं। सुबोध/२३ -०५-२०२६