अंतर्राष्ट्रीय
25-May-2026
...


-ट्रम्प की नई नीतियों व नियमों के चलते मंडरा रहा डिपोर्टेशन का खतरा वॉशिंगटन,(ईएमएस)। अमेरिका में 15 हजार भारतीय टेक कर्मियों की नौकरी जाने के बाद उनके सामने संकट खड़ा हो गया है। अब उनपर डिपोर्टेशन का खतरा मंडरा रहा है। दरअसल, ये सभी एच-1बी वीजा पर अमेरिका आए थे, लेकिन छंटनी के बाद इनके पास नई नौकरी ढूंढने व वीजा स्टेटस बचाने के लिए सीमित समय है। नियमों के तहत नौकरी जाने के बाद इन्हें 60 दिनों में नई नौकरी खोजनी होगी। इस दौरान नया एम्प्लॉयर या स्पॉन्सर नहीं मिला, तो अमेरिका छोड़ना पड़ेगा। बीते दिनों मेटा, अमेजन और ओरेकल जैसी बड़ी टेक कंपनियों में करीब 50 हजार लोगों की छंटनी और रिस्ट्रक्चरिंग हुई है। इनमें 15 हजार से ज्यादा भारतीय हैं। मीडिया रिपोर्ट के मुताबि पहले नौकरी जाने पर टेक कर्मियों को जल्दी नया मौका मिलता था, लेकिन अब इंटरव्यू लंबा होता जा रहा है। कंपनियां वीजा स्पॉन्सर करने से बच रही हैं और ट्रम्प की नई नीतियों के चलते उनके पास वीजा कोटा भी कम है। ट्रम्प प्रशासन की सख्त इमिग्रेशन नीति ने भी डर को बढ़ा दिया है। छोटी गलती, दस्तावेजों की कमी या वीजा नियमों में चूक भी खतरा बन रही है। अब नौकरी जाने पर उसी सेक्टर और उसी स्तर व सैलरी ब्रैकेट की नौकरी मिलनी चाहिए यानी सॉफ्टवेयर इंजीनियर होटल में शेफ बनकर एच-1बी स्टेटस नहीं बचा सकता। अब कंपनी को भी ज्यादा दस्तावेज देने पड़ रहे हैं। उन्हें बताना पड़ रहा है कि इस पद के लिए अमेरिकी क्यों नहीं मिला। ट्रम्प प्रशासन ने ग्रीन कार्ड प्रक्रिया भी सख्त कर दी है। आवेदक को अपने देश जाकर आवेदन करना होगा। अभी अमेरिका में रहते हुए ‘एडजस्टमेंट ऑफ स्टेटस’ से ग्रीन कार्ड ​मिलता था। एच-1बी जैसे अस्थायी वीजा पर काम कर रहे भारतीयों पर बड़ा असर पड़ेगा। पांच साल में 49.97 लाख ग्रीन कार्ड जारी किए गए हैं। इनमें 29.32 लाख अमेरिका में रहते हुए व 20.63 लाख होम कंट्री में रहते हुए आवेदन करने वालों को मिले। 2014 से 2023 के बीच कुल 7.26 लाख भारतीयों को ग्रीन कार्ड मिला। रिपोर्ट के मुताबिक नई नीति में भारत जाकर कांसुलेट से प्रक्रिया करनी पड़ेगी। अब इंटरव्यू, सुरक्षा जांच और दस्तावेज जांच में देरी बढ़ेगी। प्रोसेसिंग लंबी चली, तो नौकरी-वापसी पर खतरा होगा। जॉब बेस्ड ग्रीन कार्ड बैकलॉग प्रभावितों में भारत सबसे आगे है। एक संस्था के मुताबिक, ऐसे 18 लाख बैकलॉग में 11 लाख मामले भारतीयों के हैं। नए भारतीय आवेदकों के लिए ग्रीन कार्ड का वेटिंग पीरियड 10-15 साल का है। सिराज/ईएमएस 25 मई 2026