अंतर्राष्ट्रीय
25-May-2026
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मॉस्को,(ईएमएस)। रूस ने यूक्रेन युद्ध में एक नए और खतरनाक आयाम को जन्म दिया है, जहां वह अब यूक्रेनी ड्रोनों को हवा में ही हाईजैक कर उन्हें नाटो देशों की ओर मोड़ दे रहा है। यह कोई गोली-बारूद से नहीं, बल्कि जीपीएस सिग्नल को धोखा देकर कर रहा है, जिसने युद्ध के मैदान में एक नई चुनौती पेश की है। रूस अपनी अत्याधुनिक जैमिंग और स्पूफिंग तकनीक का इस्तेमाल कर यूक्रेनी ड्रोनों को भ्रमित कर देता है, जिससे वे अपना रास्ता भटक जाते हैं और अनजाने में नाटो सदस्य देशों की सीमाओं में प्रवेश करते हैं। हाल ही में लिथुआनिया की राजधानी विल्नियस में अचानक हवाई हमले का अलर्ट जारी होने से पूरे यूरोप में हड़कंप मच गया था। राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को बम-प्रूफ बंकरों में शरण लेनी पड़ी, हवाई उड़ानें रद्द की गईं और हजारों लोग भूमिगत पार्किंग में छिप गए। नाटो सदस्य देश की राजधानी में युद्ध शुरू होने के बाद यह पहला ऐसा बड़ा अलर्ट था। बाद में खुलासा हुआ कि ऊपर उड़ रहे ड्रोन असल में यूक्रेन के थे, जिन्हें रूस ने हाईजैक किया था। रूस इस काम को दो मुख्य तरीकों से अंजाम दे रहा हैं, जैमिंग और स्पूफिंग के दौरा। सबसे पहले, वह ड्रोन के जीपीएस सिग्नल को शक्तिशाली नॉइज़ से बाधित (जैम) कर देता है, जिससे ड्रोन अपना रास्ता भटक जाता है और नया सिग्नल ढूंढने लगता है। ठीक तभी रूस एक नकली लेकिन बेहद मजबूत जीपीएस सिग्नल भेजता है। ड्रोन नकली सिग्नल को असली मानकर उस पर भरोसा कर लेता है। रूस सफलतापूर्वक ड्रोन को यह भ्रम पैदा कर देता है कि वह रूस के भीतर सुरक्षित रूप से उड़ रहा है, जबकि असल में वह नाटो देशों की सीमा की ओर तेज़ी से बढ़ रहा होता है। इतना ही नहीं, रूस ड्रोन को समय की गलत जानकारी भी देता है, कभी दशकों पुराना, कभी भविष्य का जिससे ड्रोन का आंतरिक कंप्यूटर पूरी तरह भ्रमित हो जाता है और अंततः वह क्रैश हो जाता है। इस नई रणनीति का नाटो देशों पर गंभीर असर पड़ रहा है। लिथुआनिया के अलावा, लातविया, एस्टोनिया और फिनलैंड जैसे देशों में भी ऐसे कई ड्रोन घुसपैठ कर चुके हैं। लातविया में एक तेल भंडारण सुविधा पर ड्रोन गिरकर फट गया, जबकि एस्टोनिया में नाटो के एफ-16 विमान को पहली बार किसी ड्रोन को मार गिराना पड़ा। इन घटनाओं के राजनीतिक परिणाम भी देखने को मिले हैं; लातविया की प्रधानमंत्री को ड्रोन घुसपैठ के मामले में इस्तीफा देना पड़ा था। ये घटनाएं नाटो देशों की पूर्वी सीमा पर लगातार बढ़ रही हैं, जिससे इन देशों की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं। यूक्रेन के लिए यह एक बड़ा झटका है, क्योंकि ड्रोन उसके सबसे सस्ते और प्रभावी हथियारों में से एक हैं। कुछ हजार रुपये में बने ये ड्रोन रूस के अंदर सैकड़ों किलोमीटर दूर तक जाकर मॉस्को, तेल भंडारण सुविधाओं और रडार स्टेशनों जैसे महत्वपूर्ण ठिकानों पर हमला करते रहे हैं। अब रूस उन्हीं ड्रोनों को पलटकर न केवल यूक्रेन के खिलाफ बल्कि नाटो देशों पर भी इस्तेमाल कर रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि रूस का मुख्य केंद्र कालिनिनग्राद में है, जहां से बहुत शक्तिशाली ट्रांसमीटर लगातार जीपीएस सिग्नल को बाधित कर रहे हैं। रूस ने उपग्रहों के माध्यम से भी जैमिंग करने की क्षमता विकसित कर ली है। इस पूरी कवायद का मकसद सिर्फ ड्रोन को निष्क्रिय करना नहीं, बल्कि नाटो सदस्य देशों में राजनीतिक अस्थिरता पैदा करना और पश्चिमी गठबंधन की एकता को तोड़ना है। रक्षा विशेषज्ञ कहते हैं कि रूस बिना सीधे सैन्य हमला किए नाटो की ताकत और एकता की परीक्षा ले रहा है। हालांकि, यूक्रेन भी इस चुनौती से निपटने के लिए तैयार है। वह अब इसतरह के फाइबर ऑप्टिक ड्रोन (जो तार से जुड़े होते हैं) और एआई गाइडेड ड्रोन (जो कैमरे और मैप के सहारे चलते हैं) विकसित कर रहा है, जो जीपीएस पर निर्भर नहीं होते और इस तरह जैमिंग के प्रभाव से बच सकते हैं। रूस की यह नई तकनीक युद्ध के रूप को मौलिक रूप से बदल रही है। सस्ते ड्रोन अब आसानी से दुश्मन के हथियार बन सकते हैं, जिससे यूरोप और नाटो देशों के लिए एक नई और जटिल चुनौती खड़ी हो गई है। आशीष/ईएमएस 25 मई 2026