राज्य
25-May-2026
...


* जीआई टैग प्राप्त हस्तकलाओं को मिलेगा वैश्विक मंच, वडोदरा बनेगा उद्योग और परंपरा का संगम गांधीनगर (ईएमएस)| जून महीने के अंतिम सप्ताह में मध्य गुजरात क्षेत्र के लिए वडोदरा में आयोजित होने वाली आगामी वाइब्रेंट गुजरात रीजनल कॉन्फ्रेंस (वीजीआरसी) न केवल क्षेत्र के औद्योगिक विकास को नई गति देगी, बल्कि मध्य गुजरात की समृद्ध हस्तकला परंपरा को भी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रदर्शित करेगी। इस क्षेत्रीय कॉन्फ्रेंस में मध्य गुजरात के उन पारंपरिक हस्तकला उत्पादों को विशेष स्थान मिलने की संभावना है, जिन्हें पहले ही भौगोलिक संकेतक (जीआई) टैग प्राप्त हो चुका है या जो जीआई टैग पंजीकरण प्रक्रिया में हैं। जीआई टैग किसी उत्पाद की विशिष्ट पहचान और उसकी गुणवत्ता को उसके मूल भौगोलिक क्षेत्र से जोड़ने वाला प्रमाण माना जाता है। मध्य गुजरात अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और पारंपरिक कलाओं के लिए प्रसिद्ध है। यहां की कई हस्तकलाओं को जीआई टैग प्राप्त हो चुका है, जिनमें अहमदाबाद सोदागरी ब्लॉक प्रिंट, मातानी पछेड़ी, पिथोरा पेंटिंग, पेठापुर प्रिंटिंग ब्लॉक्स, खंभात के अकीक और संखेड़ा फर्नीचर प्रमुख हैं। अहमदाबाद के जामालपुर क्षेत्र में प्रचलित सोदागरी ब्लॉक प्रिंट कला को वर्ष 2024 में जीआई टैग मिला था। यह सदियों पुरानी हाथ से कपड़े छापने की तकनीक है, जिसे पीढ़ियों से छीपा समुदाय के कारीगर संरक्षित करते आ रहे हैं। मातानी पछेड़ी कला, जिसे पारंपरिक रूप से देवीपूजक समुदाय द्वारा तैयार किया जाता है, को वर्ष 2023 में जीआई टैग प्रदान किया गया। यह कपड़े पर देवी-देवताओं की चित्रकारी की पवित्र कला है, जो अहमदाबाद और खेड़ा जिलों में विशेष रूप से प्रचलित है। पिथोरा पेंटिंग मध्य गुजरात की एक अनूठी जनजातीय भित्ति चित्रकला है, जिसे राठवा, भील और भीलाला आदिवासी समुदाय द्वारा बनाया जाता है। जीवंत रंगों, प्रतीकों और पारंपरिक संरचनाओं से सजी इस कला को वर्ष 2021 में जीआई टैग प्राप्त हुआ था। यह कला मुख्य रूप से छोटाउदेपुर और पंचमहल जिलों में देखने को मिलती है। गांधीनगर जिले के पेठापुर गांव में पिछले 300 वर्षों से अधिक समय से तैयार किए जा रहे पेठापुर प्रिंटिंग ब्लॉक्स अपनी बारीक हस्त-नक्काशी तकनीक के लिए विश्वभर में प्रसिद्ध हैं। इस कला को वर्ष 2018 में जीआई टैग प्रदान किया गया था। आणंद जिले के खंभात में निर्मित अर्ध-कीमती रत्न ‘अकीक ऑफ कंबे’ को वर्ष 2008 में जीआई टैग मिला था। यह कला हड़प्पा सभ्यता के समय से चली आ रही मानी जाती है और आज भी अपनी ऐतिहासिक पहचान बनाए हुए है। वडोदरा जिले के संखेड़ा शहर में खराड़ी-सुथार समुदाय द्वारा निर्मित संखेड़ा फर्नीचर अपनी कलात्मक डिजाइन, पारंपरिक मरून और सुनहरे रंग संयोजन तथा मजबूत सागवान लकड़ी के उपयोग के लिए विशेष पहचान रखता है। इसे भी वर्ष 2008 में जीआई टैग प्राप्त हुआ था। इसके अतिरिक्त दाहोद का बीड वर्क (मणका कला) और खंभात की पतंग जैसे उत्पाद, जो वर्तमान में जीआई टैग पंजीकरण प्रक्रिया में हैं, उन्हें भी वीजीआरसी मध्य गुजरात में प्रदर्शित किए जाने की संभावना है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ‘विकसित भारत@2047’ विजन के अनुरूप इन पारंपरिक उत्पादों को ‘वोकल फॉर लोकल’ अभियान के तहत प्रोत्साहन दिया जा रहा है। इन हस्तकलाओं को वैश्विक बाजार से जोड़ने के प्रयास लगातार मजबूत किए जा रहे हैं। वडोदरा में आयोजित होने वाली आगामी वीजीआरसी मध्य गुजरात के जीआई टैग प्राप्त उत्पादों को वैश्विक मंच प्रदान करेगी, जिससे पारंपरिक कारीगरों और स्थानीय उद्यमियों को सीधे अंतरराष्ट्रीय बाजारों से जुड़ने का अवसर मिलेगा। पूर्व में आयोजित वाइब्रेंट गुजरात रीजनल कॉन्फ्रेंस ने क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को मजबूती देने के साथ-साथ स्थानीय संस्कृति और परंपराओं को वैश्विक पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इस कॉन्फ्रेंस में विभिन्न समझौता ज्ञापनों (एमओयू) के आदान-प्रदान के साथ-साथ वेंडर डेवलपमेंट प्रोग्राम, रिवर्स बायर-सेलर मीट, व्यापार प्रदर्शनी और सेक्टर-विशिष्ट पवेलियन जैसे कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे। इसके अलावा औद्योगिक परियोजनाओं का उद्घाटन, एमएसएमई के लिए पुरस्कार वितरण, समर्पित बी2बी और बी2जी नेटवर्किंग सत्र, उद्यमी मेले, औद्योगिक एवं पर्यटन स्थलों की यात्राएं तथा वैश्विक भारतीय प्रवासी समुदाय के साथ अंतरराष्ट्रीय साझेदारी समझौते भी इस आयोजन का हिस्सा होंगे। स्थानीय उद्योगों को वैश्विक निवेशकों से जोड़ने और मध्य गुजरात की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, नवाचार तथा पारंपरिक कौशल को विश्व मंच पर प्रस्तुत करने वाली यह आगामी वीजीआरसी मध्य गुजरात को वैश्विक निवेश और सांस्कृतिक पहचान के नए केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगी। सतीश/25 मई