25-May-2026
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गुना (ईएमएस)। प्रयत्न से ही नदियों का पुर्नजीवन संभव- कैलाश मंथन* प्रयत्न से ही सुनिश्चित होती है सफलता : कैलाश मंथन*गोवर्धनाथ मंदिर सहित अंचल के विभिन्न सत्संग मंडलों में श्री गंगा दशहरा के अवसर पर विशेष मनोरथ एवं यमुना महोत्सव संपन्न हुए। ठाकुर जी को नाव विहार कराया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ करते हुए पुष्टिमार्गीय केंद्रों पर परिषद के प्रांतीय प्रचार प्रमुख कैलाश मंथन ने कहा कि भागीरथ प्रयत्नों से ही कठिन से कठिन काम की सिद्धी होती है। असंभव को संभव बनाया जा सकता है। इस अवसर पर शहर एवं अंचल के प्रमुख उद्यानों एवं स्थानों पर त्रिवेणी पीपल, बरगद, नीम, अर्जुन आदि का पौधारोपण किया गया। वहीं अंचल के शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों में 30 जुलाई तक 11 हजार वृक्षारोपण का लक्ष्य रखा गया है।भागीरथी प्रयत्न जरूरी है। मानवता एवं सृष्टि की रक्षा के लिए भागीरथ के अथक परिश्रम से गंगा धरती पर प्रकट हुई। वर्तमान में नदियों का अस्तित्व खतरे में हैं ऐसे में जल के संरक्षण के लिए जंगलों के काटने पर प्रतिबंध, वृक्षारोपण जरूरी है। देश में हजारों भागीरथों की आवश्यकता है। जो प्रदूषित गंगा, यमुना सहित प्रमुख नदियों एवं अंचल की नदियों को प्रदूषण से मुक्त करवा सकें एवं जल स्त्रोतों को पुनजीर्वित कर सकें। श्री मंथन ने अंचल के सूखते जा रहे पानी के स्त्रोतों एवं नदियों में फैल रहे प्रदूषण पर चिंता जताई गई। गंगा दशहरा से अंचल की नदियों को पुनजीर्वित करने का आव्हान विराट हिन्दू उत्सव समिति चिंतन मंच के तहत किया गया। चिंतन गोष्ठी में हिउस प्रमुख कैलाश मंथन ने केंद्र एवं प्रदेश सरकार से चिंतन ने मांग की है कि पर्यावरण के नाम पर प्रचार नहीं धरातल पर कार्य हों।पुर्ननवीनीकरण एवं उपचारित किए विशाल मात्रा में नदियों एवं प्रकृति में प्रवाहित कर दिया जाता है, जो हमारे पर्यावरण को प्रदूषित करता है। इससे प्रकृति के मूल्यवान पोषक तत्व भी नष्ट हो रहे हैं तथा जलीय जीवन भी प्रभावित हो रहा है। ईएमएस/मोहने/ 25 मई 2026