रायसेन (ईएमएस)। जिले में समर्थन मूल्य पर गेहूं उपार्जन की प्रक्रिया अंतिम दौर में पहुंच गई है। शासन द्वारा गेहूं विक्रय की अंतिम तारीख 28 मई तय की गई है। लेकिन इससे पहले ही हजारों किसान परेशान नजर आ रहे हैं। जिले में करीब 10 हजार से अधिक ऐसे किसान बताए जा रहे हैं जिन्होंने समय पर पंजीयन तो करा लिया, लेकिन स्लॉट बुकिंग नहीं होने के कारण वे अब तक अपनी उपज बेच नहीं पाए हैं। इससे किसानों में नाराजगी बढ़ रही है और वे जिला प्रशासन से एक बार फिर मौका देने की मांग कर रहे हैं। किसान दीवान सिंह मीणा, कालूराम मीणा, जगन्नाथ सिंह यादव राजेश पटेल का कहना है कि इस बार स्लॉट बुकिंग व्यवस्था उनके लिए बड़ी परेशानी बन गई। कई किसानों को तकनीकी दिक्कतों के कारण स्लॉट नहीं मिला तो कई किसानों को जानकारी समय पर नहीं मिल सकी। ग्रामीण क्षेत्रों में इंटरनेट नेटवर्क और ऑनलाइन प्रक्रिया की जानकारी की कमी भी किसानों के लिए मुसीबत बन गई। अब जब खरीदी की तारीख नजदीक आ गई है तो किसानों की चिंता बढ़ गई है। किसानों का आरोप है कि सरकार ने समर्थन मूल्य पर गेहूं खरीदने के लिए पंजीयन तो करा लिया।लेकिन बाद में स्लॉट बुकिंग की जटिल प्रक्रिया लागू कर दी। इससे बड़ी संख्या में छोटे और मध्यम किसान उपज बेचने से वंचित रह गए। किसानों ने कहा कि मंडियों और खरीदी केंद्रों पर कई बार चक्कर लगाने के बाद भी समाधान नहीं मिला। कई किसानों ने कर्ज लेकर फसल तैयार की थी और अब उपज घरों में रखी हुई है। ऐसे में उन्हें आर्थिक संकट का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों से आए किसानों ने प्रशासन से मांग की है कि खरीदी की तारीख बढ़ाई जाए और जिन किसानों का पंजीयन हो चुका है उन्हें बिना स्लॉट के भी उपज बेचने का मौका दिया जाए। किसानों का कहना है कि यदि ऐसा नहीं हुआ तो उन्हें मजबूरी में व्यापारियों को कम दाम पर गेहूं बेचना पड़ेगा। इधर मामले ने राजनीतिक रंग भी लेना शुरू कर दिया है। विपक्षी दल लगातार सरकार और जिला प्रशासन पर किसानों के साथ अन्याय करने का आरोप लगा रहे हैं। विपक्ष का कहना है कि ऑनलाइन व्यवस्था के नाम पर किसानों को परेशान किया जा रहा है और खरीदी प्रक्रिया में अव्यवस्था हावी है। गांव-गांव में किसानों के बीच इस मुद्दे को लेकर चर्चा तेज हो गई है। हालांकि प्रशासन और जिला खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग के अधिकारियों ने विपक्ष के आरोपों को भ्रम फैलाने वाला बताया है। अधिकारियों का कहना है कि जिन किसानों ने नियमानुसार पंजीयन कराया है, उनकी खरीदी लगातार जारी है। प्रशासन का दावा है कि खरीदी केंद्रों पर व्यवस्था बेहतर बनाए रखने के लिए स्लॉट बुकिंग जरूरी थी। ताकि एक साथ अधिक भीड़ न पहुंचे और किसानों को परेशानी न हो। अधिकारियों के अनुसार जिले में अब तक बड़ी मात्रा में गेहूं खरीदा जा चुका है और अधिकांश किसानों ने अपनी उपज बेच दी है। कुछ किसान अंतिम समय तक इंतजार करते रहे।जिसके कारण स्लॉट बुकिंग में दिक्कत आई। नॉन के प्रभारी अधिकारी राजू कातुलकर का कहना है कि किसानों की समस्याओं पर लगातार नजर रखी जा रही है और शासन स्तर पर जो भी निर्देश मिलेंगे उसके अनुसार कार्रवाई की जाएगी। खरीदी केंद्रों पर बढ़ी भीड़.. उधर खरीदी केंद्रों पर इन दिनों किसानों की भीड़ बढ़ने लगी है। कई किसान सुबह से शाम तक अपनी बारी का इंतजार करते दिखाई दे रहे हैं। गर्मी और तेज धूप के बीच किसानों की परेशानी और बढ़ गई है। किसानों का कहना है कि यदि शासन प्रशासन वास्तव में किसानों के हित में काम करना चाहता है तो अंतिम तारीख बढ़ाकर सभी पंजीकृत किसानों की खरीदी सुनिश्चित करनी चाहिए। फिलहाल जिले में गेहूं उपार्जन को लेकर असमंजस और नाराजगी का माहौल बना हुआ है। इनका कहना है.... 23 मई से किसानों की स्लॉट बुकिंग बंद हो गई है। जिन किसानों के पहले के स्लॉट बुकिंग है उनके गेहूं तुलाई कराई जा रही है। जो किसान गेहूं तुलाई से वंचित रह गए हैं। इसमें हमारा कोई कसूर नहीं है। राजू कातुलकर फूड अधिकारी रायसेन। ईएमएस/ मोहने/ 25 मई 2026