राज्य
25-May-2026
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:: कैट रोड स्थित हरिधाम आश्रम पर धूमधाम से मनाया गया श्रीराम जन्मोत्सव; हनुमत महायज्ञ की परिक्रमा के लिए उमड़ रहे श्रद्धालु :: इंदौर (ईएमएस)। सत्य कभी छुपता नहीं, सत्य कभी नष्ट नहीं होता और सत्य कभी पराजित भी नहीं होता। राम का नाम तो सत्य है ही, लेकिन राम की पावन कथा भी परम सत्य है। आज के समाज को केवल चित्र की नहीं, बल्कि उनके श्रेष्ठ चरित्र पूजन का अनुकरण करना चाहिए। राम कथा भारत भूमि का ऐसा जीवंत और अकाट्य दस्तावेज है, जिसकी सत्यता पर कोई संदेह नहीं किया जा सकता। यह प्रेरक विचार श्रीधाम वृंदावन के प्रख्यात कथाकार पं. श्रीराम प्रपन्नाचार्य महाराज ने व्यक्त किए। वे हवा बंगला, कैट रोड स्थित हरिधाम आश्रम पर सोमवार शाम को आयोजित संगीतमय श्रीराम कथा के दौरान राम जन्म प्रसंग की व्याख्या कर रहे थे। कथा में भगवान श्रीराम के प्राकट्य का प्रसंग सुनते ही पांडल में मौजूद सैकड़ों श्रद्धालु आनंद से झूम उठे। ब्रज से आए भजन गायकों और संगीतज्ञों की मनोहारी प्रस्तुतियों पर पांडाल में भजनों और नृत्य का दौर देर तक चलता रहा। कथा के प्रारंभ में हरिधाम आश्रम के महंत शुकदेवदास महाराज के सानिध्य में डॉ. सुरेश चोपड़ा, ललित अग्रवाल, अरुण मिश्रा, विजय सिंह राणा, सुधीर अग्रवाल, ओमप्रकाश अग्रवाल और सीताराम नरेडी आदि ने व्यास पीठ का विधि-विधान से पूजन किया। अतिथियों का स्वागत संजय अग्रवाल, गुमान सिंह ठाकुर, मांगीलाल ठाकुर, संतोष सिंह एवं सौरभ पाटिल ने किया। इस धार्मिक अनुष्ठान में इंदौर शहर के अलावा आसपास के 25 गांवों से बड़ी संख्या में ग्रामीण श्रद्धालु भी कथा श्रवण के लिए पहुंच रहे हैं। कथा प्रतिदिन दोपहर 3:00 से शाम 6:00 बजे तक आयोजित की जा रही है। :: हनुमत महायज्ञ में आहुतियों का महासंकल्प :: आश्रम परिसर में यज्ञाचार्य पं. ललित पाठक के निर्देशन में 51 विद्वानों द्वारा लोक कल्याण के लिए हनुमत महायज्ञ का संचालन किया जा रहा है। महायज्ञ में विद्वानों और यजमानों द्वारा कवन सो काज कठिन जग माहीं, जो नहीं होइ तात तुम पाहीं महामंत्र के साथ विश्व शांति, जनकल्याण और राष्ट्र में सद्भाव की कामना से आहुतियां समर्पित की जा रही हैं। यज्ञशाला में प्रतिदिन 1 लाख 60 हजार आहुतियां दी जा रही हैं, और अब तक कुल 4 लाख 80 हजार आहुतियां पूरी हो चुकी हैं। यह महायज्ञ प्रतिदिन सुबह 8:00 से दोपहर 1:30 बजे तक संपन्न हो रहा है। :: परिक्रमा में पहुंच रहे दिव्यांग और दृष्टिहीन :: यज्ञशाला की परिक्रमा भी सोमवार से प्रारंभ हो गई है। आस्था के इस केंद्र पर बड़ी संख्या में दिव्यांग, दृष्टिहीन और विभिन्न असाध्य बीमारियों से पीड़ित श्रद्धालु भी मन्नत और स्वास्थ्य लाभ की कामना लेकर परिक्रमा करने पहुंच रहे हैं। भीषण गर्मी को देखते हुए परिक्रमा स्थल पर आयोजकों द्वारा उत्तम छाया, ठंडे पेयजल सहित अन्य आवश्यक सुविधाएं चाक-चौबंद की गई हैं। विद्वान वक्ता पं. प्रपन्नाचार्य ने आगे कहा कि भगवान राम का चरित्र ही उन्हें ईश्वर से भी बड़ा बनाता है, यही कारण है कि स्वयं देवों के देव महादेव भी निरंतर राम नाम की आराधना करते हैं। अहिल्या जैसी पाषाण की मूरत को अपने चरण स्पर्श से जीवंत करने की अलौकिक क्षमता केवल प्रभु श्रीराम में ही थी। जटायु जैसे पक्षी को मोक्ष देना और हनुमानजी के माध्यम से वानर सेना को जोड़ना राम कथा के सबसे बड़े प्रेरक उदाहरण हैं। राम और कृष्ण इस पुण्यभूमि के प्राणतत्व हैं और यही हमारे सनातन धर्म के आधार हैं। प्रकाश/25 मई 2026