मुम्बई (ईएमएस)। इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) में जहां आजकल प्लेऑफ और उसके बाद होने वाले फाइनल से विजेता का फैसला होता है। वहीं लीग के शुरुआती तीन सत्र में प्लेऑफ का ये प्रारुप नहीं था। ऐसे में उस दौर में टूर्नामेंट के विजेता का फैसला पारंपरिक प्रणाली से होता था। आईपीएल के पहले तीन संस्करणों (2008, 2009 और 2010) में आज के प्लेऑफ प्रणाली की जगह एक सेमीफाइनल-फाइनल प्रारूप था। आईपीएल की शुरुआत 2008 में जब की गयी थी। तब आठ टीमें खेलती थी। डबल राउंड-रॉबिन प्रारुप के तहत हर टीम ने 14 लीग मैच खेले। अंक तालिका में शीर्ष-4 पर रहने वाली टीमें सीधे सेमीफाइनल में पहुंचती थीं, जिसके बाद फाइनल खेला जाता था। यहां कोई दूसरा अवसर नहीं मिलता था, हर मैच नॉकआउट वाला होता था, क्योंकि एक खराब दिन किसी भी शीर्ष टीम को खिताब की दौड़ से बाहर कर सकता था। वहीं आज क्वालीफायर-1 या एलिमिनेटर मुकाबले खेलन होते हैं जिससे टीम का दूसरा अवसर भी मिल जाता है। पहला आईपीएल सत्र 2008 में खेला गया, जिसमें शेन वार्न की कप्तानी वाली राजस्थान रॉयल्स ने जीत हासिल की थी। अंक तालिका में शीर्ष पर रहने के बाद उन्होंने चेन्नई सुपर किंग्स को फाइनल में हराकर पहला खिताब जीता था। वहीं साल 2009 में, यह टूर्नामेंट दक्षिण अफ्रीका में हुआ था। इस बार भी प्रारुप पहले जैसा ही था। 2008 के सत्र में अंक तालिका में सबसे नीचे रही डेक्कन चार्जर्स ने शानदार वापसी करते हुए चेन्नई सुपर किंग्स, रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु और दिल्ली डेयरडेविल्स को पीछे छोड़ते हुए फाइनल तक का सफर तय किया। एडम गिलक्रिस्ट की कप्तानी में डेक्कन चार्जर्स ने फाइनल में रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु को हराकर खिताब जीता था। 2010 में, मुंबई इंडियंस, डेक्कन चार्जर्स, चेन्नई सुपर किंग्स और रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु शीर्ष चार में रही थी। चेन्नई सुपर किंग्स ने फाइनल में मुंबई इंडियंस को हराकर खिताब जीता। इन शुरुआती सालों में, कई बार ऐसा होता था कि लीग स्तर में लगातार अच्छा प्रदर्शन करने वाली टीमों का सेमीफाइनल में एक खराब मैच उन्हें खिताब से दूर कर देता था। इसी चुनौती को दूर करने और शीर्ष-2 टीमों को फाइनल में पहुंचने के दो अवसर देने के लिए 2011 से प्लेऑफ प्रणाली को अपनाया गया। इस नए प्रारूप में क्वालीफायर और एलिमिनेटर जैसे मुकाबले शामिल किए गए, जिससे टूर्नामेंट और अधिक रोमांचक बन गया और निरंतर अच्छा प्रदर्शन करने वाली टीमों को अधिक स्थिरता मिली। गिरजा/ईएमएस 26 मई 2026