नवी मुंबई, (ईएमएस)। नवी मुंबई के नेरुल सेक्टर-25 स्थित बिहार मित्र मंडल द्वारा बाहर से आने वाले कैंसर मरीजों के ठहरने हेतु निर्मित भारतरत्न डॉ. राजेन्द्र प्रसाद भवन के प्रांगण में, गत वर्षों की भांति इस वर्ष भी श्रीमद्भागवत कथा का भव्य आयोजन किया गया है। इस अवसर पर वृंदावन से पधारे पंडित अजीत कृष्ण शास्त्री जी के श्रीमुख से श्रद्धालु विगत छह दिनों से कथा अमृत का रसपान कर रहे हैं। कथा के दौरान प्रस्तुत भजन एवं मनमोहक झांकियां प्रतिदिन कार्यक्रम की शोभा बढ़ा रही हैं। कथावाचक पंडित अजीत कृष्ण शास्त्री जी ने भागवत कथा के मूल उद्देश्य पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इसका सार परमात्मा की प्राप्ति है। यह ग्रंथ संसार से पलायन नहीं, बल्कि गृहस्थ जीवन में रहकर ईश्वर के प्रति अनन्य प्रेम, भक्ति और निष्काम कर्म का संदेश देता है। कथा यह सिखाती है कि जब मनुष्य सांसारिक मोह-माया का त्याग कर हृदय में निर्मल भक्ति और वैराग्य जागृत करता है, तभी ईश्वर की प्राप्ति संभव होती है। उन्होंने कहा कि श्रीमद्भागवत में भगवान विष्णु के विभिन्न अवतारों, विशेष रूप से भगवान श्रीकृष्ण की दिव्य लीलाओं का वर्णन है, जो यह संदेश देती हैं कि ईश्वर सर्वव्यापी हैं। मनुष्य को अपने अहंकार का त्याग कर प्रभु के चरणों में पूर्ण समर्पण भाव से शरणागत हो जाना चाहिए। भागवत शब्द स्वयं अपने अर्थ को स्पष्ट करता है— *भा* अर्थात भक्ति, *ग* अर्थात ज्ञान, *व* अर्थात वैराग्य, और *त* अर्थात तत्त्व या परमेश्वर। सनातन धर्म में श्रीमद्भागवत को समस्त वेदों एवं उपनिषदों का सार माना गया है। मान्यता है कि इसके श्रवण मात्र से मनुष्य पाप एवं भय से मुक्त हो जाता है। भागवत पुराण हिन्दू धर्म के अठारह प्रमुख पुराणों में से एक है, जिसे श्रीमद्भागवतम् अथवा भागवतम् भी कहा जाता है। इसका मुख्य विषय भक्ति योग है, जिसमें भगवान श्रीकृष्ण को स्वयं परमेश्वर के रूप में वर्णित किया गया है। भगवान शुकदेव जी द्वारा महाराज परीक्षित को सुनाया गया यह भक्तिमार्ग मानो मोक्ष का सोपान है। इसके प्रत्येक श्लोक में श्रीकृष्ण प्रेम की सुगंध व्याप्त है। इसमें साधन-ज्ञान, सिद्ध-ज्ञान, साधन-भक्ति, सिद्धा-भक्ति, मर्यादा मार्ग, अनुग्रह मार्ग, द्वैत एवं अद्वैत समन्वय सहित अनेक प्रेरणादायी उपाख्यानों का अद्भुत संग्रह है। यहां बता दें कि बिहार मित्र मंडल का सांस्कृतिक मण्डल समय-समय पर ऐसे धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन संस्था के वरिष्ठों के नेतृत्व में करता रहता है, जिनका लाभ हजारों श्रद्धालु प्राप्त करते हैं। इस वर्ष कथा के यजमान अनिल सिंह एवं राकेश जायसवाल अपने परिवार सहित हैं। कथा के दौरान प्रतिदिन प्रसाद एवं महाप्रसाद की व्यवस्था संस्था के पदाधिकारियों द्वारा की गई है। आज कथा का सप्तम एवं समापन दिवस है। अधिकमास में आयोजित इस श्रीमद्भागवत कथा में भगवतभक्ति में डूबे श्रद्धालु कथा आयोजकों के प्रति कोटि-कोटि धन्यवाद ज्ञापित करते नजर आ रहे हैं। - २६ मई/२०२६/ईएमएस