महिलाओं में होने वाली सबसे सामान्य हार्मोनल समस्याओं में से एक PCOS (Polycystic Ovary Syndrome) को अब कई विशेषज्ञ PMOS (Polymetabolic Ovary Syndrome) के नाम से संबोधित करने लगे हैं। यह बदलाव इस बात को दर्शाता है कि यह समस्या केवल ओवरी तक सीमित नहीं है, बल्कि शरीर के मेटाबॉलिज्म और हार्मोनल संतुलन को भी प्रभावित करती है। नाम बदलने की आवश्यकता क्यों पड़ी?लब्ध प्रतिष्ठ होम्योपैथी चिकित्सक डॉ ऋद्धि अग्रवाल ने इस संबंध में जानकारी देते हुए बताया कि यह एक पहले PCOS को मुख्य रूप से ओवरी में सिस्ट और अनियमित पीरियड्स से जोड़कर देखा जाता था। लेकिन अब डॉक्टरों और शोधकर्ताओं का मानना है कि कई महिलाओं में PCOS के लक्षण होते हैं, जबकि ओवरी में सिस्ट नहीं पाए जाते। यह समस्या शरीर में कई प्रकार के मेटाबॉलिक बदलावों से जुड़ी होती है, जैसे: इंसुलिन रेजिस्टेंस वजन बढ़ना हार्मोनल असंतुलन मुंहासे और बाल झड़ना प्रजनन संबंधी समस्याएं डायबिटीज और लाइफस्टाइल बीमारियों का बढ़ता खतरा इसी कारण PMOS शब्द को अधिक उपयुक्त माना जा रहा है। पुराने नाम (PCOS) से अक्सर लोगों को लगता था कि यह सिर्फ महिलाओं के प्रजनन अंगों या सिस्ट की बीमारी है。 नए नाम (PMOS) से यह स्पष्ट होता है कि यह एंडोक्राइन (अंतःस्रावी ग्रंथियों) और मेटाबॉलिज्म से जुड़ी बीमारी है, जिससे निदान में तेजी आएगी और टाइप-2 डायबिटीज, मोटापा व दिल की बीमारियों जैसे खतरों पर बेहतर ध्यान दिया जा सकेगा。प्रमुख लक्षणअनियमित मासिक धर्म या अधिक रक्तस्राव。वजन का तेजी से बढ़ना और कम करने में अत्यधिक कठिनाई。चेहरे पर मुंहासे और असामान्य रूप से बालों का उगना (Androgen हार्मोन के कारण)。बचाव और प्रबंधनचूंकि यह एक मेटाबॉलिक सिंड्रोम है, इसलिए जीवनशैली में बदलाव इसका सबसे बड़ा उपचार है :खान-पान: प्रोसेस्ड फूड और चीनी से बचें। ब्लड शुगर नियंत्रित रखने के लिए फाइबर और प्रोटीन से भरपूर आहार लें。व्यायाम: नियमित रूप से व्यायाम और योग को दिनचर्या में शामिल करें。वजन कम करना: 5 से 10 प्रतिशत वजन घटाने से भी हार्मोन्स में काफी सुधार देखा जाता है युवतियों में बढ़ते मामले विशेषज्ञों के अनुसार, तनाव, खराब खानपान, शारीरिक गतिविधियों की कमी और अनियमित दिनचर्या के कारण किशोरियों और युवा महिलाओं में हार्मोनल असंतुलन के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। इसके सामान्य लक्षण हैं: अनियमित या मिस्ड पीरियड्स अचानक वजन बढ़ना चेहरे पर अधिक बाल आना लगातार मुंहासे बाल पतले होना थकान और मूड स्विंग्स डॉक्टर महिलाओं को सलाह देते हैं कि ऐसे लक्षणों को नजरअंदाज न करें और समय पर चिकित्सकीय सलाह लें। डाॅ ऋद्धि अग्रवाल के अनुसार PMOS में होम्योपैथी की भूमिका काफी सहज और बेहतर परिणाम देती है। यह चिकित्सा पद्धति का सबसे बड़ा लाभ यह है कि यह साइड इफेक्ट यानि कोई दुष्प्रभाव नही डालती है यही कारण है कि आजकल होम्योपैथी को PMOS के लिए एक समग्र और सहायक उपचार पद्धति माना जा रहा है। यह केवल लक्षणों को दबाने के बजाय व्यक्ति के संपूर्ण हार्मोनल, मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पर ध्यान देती है। होम्योपैथिक उपचार में रोगी की शारीरिक और मानसिक स्थिति को समझकर उपचार योजना बनाई जाती है। इसका उद्देश्य शरीर के प्राकृतिक संतुलन को बेहतर बनाना और संपूर्ण स्वास्थ्य को सहयोग देना होता है। डाॅ ऋद्धि के अनुसार होम्योपैथी निम्न क्षेत्रों में सहायक हो सकती है: हार्मोनल संतुलन सुधारने में मदद पीरियड्स की अनियमितता को कम करने में सहायता तनाव से जुड़ी समस्याओं को कम करने में मदद शरीर के मेटाबॉलिक स्वास्थ्य को समर्थन देना मुंहासों और बालों से संबंधित समस्याओं में प्राकृतिक सहायता विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि नियमित व्यायाम, संतुलित आहार, पर्याप्त नींद और तनाव प्रबंधन लंबे समय तक हार्मोनल स्वास्थ्य बनाए रखने के लिए अत्यंत आवश्यक हैं। जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता विशेषज्ञों का मानना है कि PMOS के प्रति जागरूकता अभी भी काफी कम है, विशेषकर छोटे शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों में। समय पर पहचान और सही प्रबंधन से प्रजनन संबंधी समस्याओं, मोटापा, डायबिटीज और मानसिक तनाव जैसी जटिलताओं से बचा जा सकता है। महिलाओं के हार्मोनल स्वास्थ्य को लेकर बदलती समझ यह संकेत देती है कि PCOS को केवल ओवरी की समस्या नहीं, बल्कि पूरे शरीर के मेटाबॉलिक स्वास्थ्य से जुड़ी स्थिति के रूप में देखा जाना चाहिए। आधुनिक चिकित्सा शोध लगातार स्वास्थ्य मे बेहतरी की दिशा में आगे जारी है। इस के लिए चिकित्सकों का अध् तन ज्ञान अत्यंत महत्वपूर्ण है ताकि ने शोध के अनुसार इलाज दिया जाए। (लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं पिछले 38 वर्ष से लेखन और पत्रकारिता से जुड़े हैं) ईएमएस/27/05/2026