अंतर्राष्ट्रीय
27-May-2026
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दिल्ली के बजाय बीजिंग को दी प्राथमिकता ढाका (ईएमएस)। भारत के पड़ोसी देश बांग्लादेश के साथ कभी बेहद मधुर संबंध हुआ करते थे, लेकिन पिछले कुछ समय में वहां हुए बड़े सियासी उलटफेर के बाद दोनों देशों के बीच तनातनी काफी बढ़ गई है। शेख हसीना के प्रधानमंत्री पद से हटने और भारत में शरण लेने के बाद से ही ढाका और नई दिल्ली के रिश्तों में एक बड़ी खाई देखने को मिल रही है। हालांकि, बांग्लादेश में तारिक रहमान की नई सरकार के गठन के बाद यह कयास लगाए जा रहे थे कि दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों में सुधार आएगा, लेकिन हालिया घटनाक्रम और रणनीतिक संकेत कुछ और ही कहानी बयां कर रहे हैं। ऐसा प्रतीत होता है कि पड़ोसी देश में सिर्फ नेतृत्व बदला है, लेकिन भारत के प्रति पुराना रवैया बरकरार है। खबरों के मुताबिक, बांग्लादेश के नवनिर्वाचित प्रधानमंत्री तारिक रहमान आगामी जून महीने के अंत में चीन के आधिकारिक दौरे पर जा सकते हैं। कार्यभार संभालने के बाद यह उनका पहला आधिकारिक विदेश दौरा होगा। कूटनीतिक हलकों में यह कदम इसलिए बेहद चौंकाने वाला माना जा रहा है क्योंकि भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से पहले ही उन्हें भारत आने का निमंत्रण मिल चुका था। इसके अलावा, पहले इस बात की भी पुरजोर चर्चा थी कि तारिक रहमान अपनी पहली विदेश यात्रा के तौर पर भूटान को चुन सकते हैं। इसके बावजूद, सभी कयासों को दरकिनार करते हुए उन्होंने बीजिंग यात्रा को प्राथमिकता दी है, जिससे साफ संकेत मिलता है कि बांग्लादेश फिलहाल भारत के साथ अपने ठंडे पड़े रिश्तों को सुधारने में ज्यादा उत्सुकता नहीं दिखा रहा है। इस रणनीतिक कदम पर बांग्लादेश में चीन के राजदूत याओ वेन ने बयान जारी कर कहा है कि प्रधानमंत्री तारिक रहमान की यह चीन यात्रा दोनों देशों की रणनीतिक साझेदारी को एक नई ऊंचाई और मजबूती प्रदान करेगी। चीन ने बांग्लादेश में राजनीतिक स्थिरता, आर्थिक विकास और विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं में हर संभव वित्तीय और तकनीकी सहयोग देने का भरोसा जताया है। इस आगामी दौरे के दौरान तीस्ता नदी प्रबंधन और पुनर्वास परियोजना जैसी बड़ी योजनाओं के अलावा बेल्ट एंड रोड पहल के तहत व्यापार, निवेश, उद्योग, डिजिटल अर्थव्यवस्था, जल संसाधन और स्वास्थ्य जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनी है। बांग्लादेश के विदेश मामलों के सलाहकार हुमायूं कबीर ने भी पुष्टि की है कि तीस्ता परियोजना को लेकर चीन के साथ सकारात्मक बातचीत चल रही है और चीन का एक्सिम बैंक इस परियोजना के लिए वित्तीय मदद दे सकता है, जो भारत के लिए रणनीतिक रूप से चिंता का विषय हो सकता है। वीरेंद्र/ईएमएस 27 मई 2026