अंतर्राष्ट्रीय
27-May-2026
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-अमेरिका की ईरान पर ताजा सैन्य कार्रवाई से क्या फिर भड़क सकती है जंग? वाशिंगटन (ईएमएस)। दुनिया के सबसे अहम समुद्री व्यापार मार्गों में शामिल होर्मुज स्ट्रेट से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल गुजरता है। अगर ईरान इस इलाके में दबाव बनाता है या समुद्री गतिविधियां बाधित करता है, तो इसका सीधा असर वैश्विक तेल बाजार और पश्चिमी देशों की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। असल में अमेरिका इस समय दो मोर्चों पर खेलता दिख रहा है। एक तरफ वह ईरान को बातचीत की मेज पर बनाए रखना चाहता है, दूसरी तरफ सैन्य दबाव के जरिए उसे अपनी शर्तें मानने को मजबूर करना चाहता है1 खासतौर पर ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर अमेरिका आक्रामक रुख अपना रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने साफ संकेत दिए हैं कि ईरान के समृद्ध यूरेनियम भंडार को या तो अमेरिका को सौंपना होगा या फिर अंतरराष्ट्रीय निगरानी में नष्ट करना होगा। ट्रंप ने कहा कि यह प्रक्रिया अमेरिका और ईरान के ‘सहयोग’ से हो सकती है। उनके बयान से संकेत मिलते हैं कि तेहरान अपने रुख में कुछ नरमी दिखाने को तैयार हो सकता है। रिपोर्ट के मुताबिक ईरान सैद्धांतिक रूप में अपने उच्च संवर्धित यूरेनियम स्टॉक को छोड़ने पर सहमत हो गया है। माना जा रहा है कि यह अमेरिका की बड़ी कूटनीतिक जीत हो सकती है। हालांकि इस समझौते तक पहुंचने के लिए वॉशिंगटन लगातार ‘दबाव और बातचीत’ दोनों का इस्तेमाल कर रहा है। रिपोर्ट में भी कहा गया था कि ईरान के परमाणु कार्यक्रम और प्रतिबंध हटाने की भाषा को लेकर दोनों देशों में मतभेद हैं। ऐसे में अमेरिका की ताजा सैन्य कार्रवाई को ईरान को ‘मैसेज’ देने की कोशिश माना जा रहा है कि अगर समझौता नहीं हुआ तो सैन्य विकल्प हमेशा खुला है। विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि अमेरिका नहीं चाहता कि ईरान होर्मुज को किसी दबाव के हथियार की तरह इस्तेमाल करे। अगर ईरान समुद्री रास्तों में खदानें बिछाने या सैन्य गतिविधियां बढ़ाने की कोशिश करता है, तो अमेरिका और उसके सहयोगी देशों के लिए यह बड़ा खतरा बन सकता है। बता दें ईरान और अमेरिका के बीच एक तरफ युद्धविराम और शांति समझौते को लेकर बातचीत चल रही है, वहीं दूसरी तरफ अमेरिकी सेना ने दक्षिणी ईरान में सैन्य कार्रवाई कर पूरी दुनिया को चौंका दिया है। अमेरिका ने दावा किया कि उसने उन ठिकानों को निशाना बनाया है, जहां से ईरानी बल खदानें बिछाने और मिसाइल लॉन्च करने की तैयारी कर रहे थे, लेकिन सवाल उठ रहा है कि आखिर बातचीत के बीच अमेरिका ने हमला क्यों किया? हालांकि इस कार्रवाई ने एक बार फिर पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने की आशंका को बढ़ा दिया है। सवाल यह भी उठ रहा है कि क्या बातचीत और हमले की यह दोहरी नीति आगे चलकर किसी बड़े संघर्ष की वजह बन सकती है। फिलहाल अमेरिका ‘संयम’ की बात कर रहा है, लेकिन ईरान पर सैन्य दबाव बनाए रखने के संकेत भी दे रहा है। ऐसे में यह देखना अहम होगा कि शांति वार्ता आगे बढ़ती है या फिर क्षेत्र एक बार फिर बड़े टकराव की तरफ बढ़ता है। सिराज/ईएमएस 27 मई 2026