-सीबीएसई मूल्यांकन पर उठे सवाल नई दिल्ली,(ईएमएस)। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) की इस साल की 10वीं और 12वीं की परीक्षाओं की मूल्यांकन प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। बोर्ड के परीक्षा परिणामों से असंतुष्ट छात्रों ने देश के इतिहास का सबसे बड़ा रिकॉर्ड बना दिया है। इस वर्ष परीक्षा में शामिल हुए कुल परीक्षार्थियों में से हर चौथे छात्र ने बोर्ड से अपनी उत्तर पुस्तिकाओं की स्कैन कॉपी और मार्क्स वेरिफिकेशन की मांग की है। भारत के किसी भी शिक्षा बोर्ड के इतिहास में यह पहली बार है जब इतनी बड़ी संख्या में छात्रों ने मूल्यांकन प्रक्रिया पर सीधे तौर पर अविश्वास जताया है। सीबीएसई के आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, इस साल कुल 17.68 लाख स्टूडेंट्स परीक्षा में शामिल हुए थे, जिनकी कुल 98 लाख 60 हजार उत्तर पुस्तिकाओं का ऑन-स्क्रीन मार्किंग (ओएसएम) यानी डिजिटल मूल्यांकन किया गया था। जैसे ही बोर्ड ने मार्क्स वेरिफिकेशन का ऑनलाइन पोर्टल खोला, आवेदकों की बाढ़ आ गई। पोर्टल शुरू होने के शुरुआती 3 घंटे के भीतर ही रिकॉर्ड 1.26 लाख से अधिक आवेदन दर्ज हो गए, जिससे वेबसाइट का सर्वर पूरी तरह क्रैश हो गया। अब तक 4 लाख से अधिक छात्रों ने करीब 11.31 लाख कॉपियों की री-चेकिंग और स्कैन कॉपी के लिए आवेदन किया है, जो कुल परीक्षार्थियों का लगभग 23 प्रतिशत से अधिक है। यदि पिछले साल (2025) की तुलना करें तो तब केवल 1.31 लाख छात्रों ने 2.82 लाख उत्तर पुस्तिकाओं पर आपत्ति जताई थी। इस साल कॉपियों को चैलेंज करने वाले छात्रों की संख्या में 238 प्रतिशत से अधिक का अप्रत्याशित उछाल आया है, जो डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली (ओएसएम) की साख पर बड़ा सवाल खड़ा करता है। इस भारी लोड के कारण पिछले 5 दिनों से सीबीएसई का पोर्टल ठप पड़ा है। वेबसाइट पर लगातार सर्विस नॉट अवेलेबल का एरर आ रहा है, जिससे परेशान छात्र और अभिभावक रात-रात भर जागकर फॉर्म भरने को मजबूर हैं। कई छात्रों ने यह भी शिकायत की है कि उनके खाते से पैसे कट गए, लेकिन आवेदन सबमिट नहीं हो सका। इस देशव्यापी अव्यवस्था और छात्रों के बढ़ते आक्रोश पर केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने कड़ा संज्ञान लिया है। शिक्षा मंत्रालय ने सर्वर क्रैश होने, डिजिटल मूल्यांकन में आई गड़बड़ियों और छात्रों को धुंधली आंसरशीट मिलने की शिकायतों पर सीबीएसई बोर्ड को तलब किया है। मंत्रालय ने इस तकनीकी विफलता के लिए जिम्मेदार बाहरी आईटी एजेंसियों की जवाबदेही तय करते हुए बोर्ड से एक विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। छात्र फिलहाल तीन चरणों में अपनी आपत्ति दर्ज करा रहे हैं, जिसमें मार्क्स वेरिफिकेशन, उत्तर पुस्तिका की स्कैन कॉपी (पीडीएफ) प्राप्त करना और उसके बाद विशिष्ट प्रश्नों के पुनर्मूल्यांकन को चुनौती देना शामिल है। वीरेंद्र/ईएमएस/27मई 2026