जयशंकर और पेनी वॉंग के बीच रक्षा, ऊर्जा, क्रिटिकल मिनरल्स और समुद्री सहयोग पर विस्तृत चर्चा नई दिल्ली,(ईएमएस)। क्वाड देशों की विदेश मंत्रियों की बैठक के बाद भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल देखने को मिली। भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर ने ऑस्ट्रेलिया की विदेश मंत्री पेनी वॉंग के साथ द्विपक्षीय बैठक कर व्यापार, रक्षा, ऊर्जा और क्रिटिकल मिनरल्स समेत कई अहम मुद्दों पर चर्चा की। बैठक के दौरान विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा कि भारत और ऑस्ट्रेलिया के संबंध लगातार नई ऊंचाइयों तक पहुंच रहे हैं। उन्होंने बताया कि दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों की पिछली मुलाकात के बाद विभिन्न मंत्रालयों और संस्थानों के बीच सहयोग तेज हुआ है। व्यापार और निवेश के क्षेत्र में दोनों देश आर्थिक सहयोग और व्यापार समझौते (ईसीटीए) को आगे बढ़ाकर व्यापक आर्थिक सहयोग समझौते की दिशा में बातचीत कर रहे हैं। जयशंकर ने कहा कि ऊर्जा क्षेत्र में भी दोनों देशों के बीच साझेदारी मजबूत हो रही है। उन्होंने संकेत दिया कि भारत ऑस्ट्रेलिया से यूरेनियम आपूर्ति बढ़ाने का इच्छुक है, क्योंकि देश में परमाणु ऊर्जा के विस्तार की दिशा में सुधारात्मक कदम उठाए जा रहे हैं। इसके साथ ही दोनों देशों की टीमें क्रिटिकल मिनरल्स यानी महत्वपूर्ण खनिजों की उपलब्धता और सप्लाई चेन को सुरक्षित बनाने पर भी चर्चा कर रही हैं। बैठक में रक्षा सहयोग और समुद्री सुरक्षा प्रमुख मुद्दों में शामिल रहे। जयशंकर ने कहा कि भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच रक्षा अभ्यास और सैन्य आदान-प्रदान लगातार बढ़ रहे हैं। समुद्री सहयोग दोनों देशों की साझेदारी का केंद्रीय हिस्सा बन चुका है। उन्होंने कहा कि इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में स्थिरता और सुरक्षित समुद्री व्यापार सुनिश्चित करने के लिए दोनों देश मिलकर काम करेंगे। क्वाड बैठक के संदर्भ में विदेश मंत्री ने कहा कि चारों सदस्य देशों ने समुद्री निगरानी, डोमेन अवेयरनेस, लॉजिस्टिक्स नेटवर्क, समुद्र के नीचे बिछाई जाने वाली केबल्स, प्रशिक्षण, क्षमता निर्माण और आपदा राहत जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई है। उन्होंने कहा कि सुरक्षित और निर्बाध समुद्री व्यापार के लिए अंतरराष्ट्रीय कानूनों का पालन बेहद जरूरी है। जयशंकर ने कहा कि भारत, ऑस्ट्रेलिया, अमेरिका और जापान जैसे लोकतांत्रिक देशों के बीच सहयोग से इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में आर्थिक मजबूती और सप्लाई चेन सुरक्षा को नई दिशा मिलेगी। उन्होंने भरोसेमंद तकनीक, ऊर्जा सुरक्षा और उत्पादन क्षमता बढ़ाने पर भी जोर दिया। हिदायत/ईएमएस 27मई26