- जिन्ना की बंबई में दफन की थी इच्छा, भारत आकर नेहरू से माफी चाहते थे - राजेश बादल भोपाल (ईएमएस)। प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में प्रथम प्रधानमंत्री स्वर्गीय जवाहरलाल नेहरू की 62वीं पुण्यतिथि पर आयोजित श्रद्धांजलि सभा में पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने नेहरू को युगांतकारी नेता बताया उन्होंने कहा जिस तरह से शिल्पकार एक मूर्तियां बनाता है उन्होंने भारत का निर्माण किया। वे समावेशी धर्मनिरपेक्ष और विज्ञान सम्मत राष्ट्र का निर्माण करना चाहते थे। नेहरू चाहते थे कि देश के बच्चे तकनीकी कौशल हासिल करें और उच्च शिक्षा के माध्यम से दुनिया का मुकाबला करें। श्री सिंह ने कहा कि आज भारत में अंधविश्वासों को स्थापित करने की चेष्टाएं चल रही है आम नागरिक परेशान है और शासन व्यवस्था अंग्रेजों की तरह त्रासदायी हो गई है ।असहमतियों पर जुल्म होते हैं।उन्होंने कहा कि पंडित नेहरू एक सम्यक समाज का निर्माण करना चाहते थे और वे मानते थे की सांप्रदायिकता चाहे अल्पसंख्यक की हो या बहु संख्या की वह देश के लिए खतरनाक ही होती है। कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में प्रख्यात पत्रकार एवं राज्यसभा टीवी के पूर्व कार्यपालक निदेशक राजेश बादल ने उनके द्वारा निर्देशित डॉक्युमेंट्री युग पुरुष नेहरू का का प्रदर्शन किया और बताया की किस तरह खून से लथपथ भारत को उन्होंने शांति और सद्भाव के रास्ते पर आगे बढ़ाया।वे एक-एक कदम देश को प्रगति के रास्ते पर ले गए और उन्होंने भारत को जिस वैज्ञानिक उपलब्धि का भारत बनाया उसी को देखकर पाकिस्तान के निर्माता जिन्ना ने अपनी मृत्यु से पूर्व पाकिस्तान के एक अखबार फ्रंटियर पोस्ट में दिए इंटरव्यू में बताया था कि वे भारत जाकर नेहरू से माफी मांगना चाहते हैं उन्होंने मुंबई में ही दफन किए जाने की इच्छा भी व्यक्त की थी ।जिन्ना के भ्रम टूटने के कारण ही पाकिस्तान की सरकारों ने उन्हें कायदे आजम की जगह काफिरे आजम कहना शुरू कर दिया था। बादल ने कहा कि कोई भी राष्ट्र अपनी सलाहियत और बौद्धिक संपदा से ही अपनी पहचान बन सकता है और दुनिया की स्पर्धा में टिक सकता है। नेहरू को जब देश हाथ में मिला तब गरीबी थी अंग्रेज इतना लूट कर ले गए थे कि खाने के लिए अनाज भी नहीं था ।नेहरू ने सभी मोर्चों पर काम करके आत्मनिर्भर भारत का रास्ता प्रशस्त किया । प्रदेश कांग्रेस कमेटी के विचार विभाग के अध्यक्ष भूपेन्द्र गुप्ता ने कहा कि देश की पहली सरकार का बजट मात्र 197 करोड़ रुपये था,नेहरूवियन दर्शन पर निर्मित इसी भारत में आज एक छोटी सी नगरपालिका का बजट भी इससे ज्यादा है।उन्होंने कहा कि नेहरू ने जब अमरीका से स्टील प्लांट बनाने सहायता मांगी और उसने इनकार किया तो उन्होंने रूस की मदद से स्टील प्लांट बनाये और देश को निर्यातक बनाया। वे अपने फैसले पर अडिग रहे आज हम अपनी पसंद के देश से तेल भी नहीं खरीद सकते।कार्यक्रम में डा. श्याम बेनेगल द्वारा संविधान के निर्माण पर बनाई फिल्म के 10 एपिसोड और राजेश बादल ने अपनी पुस्तक विचार विभाग की डिजिटल लायब्रेरी हेतु भेंट की। विचार विभाग द्वारा आयोजित इस बौद्धिक विमर्श युगपुरुष गांधीकार्यक्रम में प्रख्यात पत्रकार सुधीर सक्सेना,पूर्व मंत्री पीसी शर्मा,भोपाल चैंबर के अध्यक्ष गोविंद गोयल,पूर्व महापौर दीपचंद यादव,जिला अध्यक्ष प्रवीन सक्सेना, कनैक्ट सेंटर प्रभारी राजीव सिंह,योगेंद्र परिहार,डा.धाकड़,करन सहगल,अभिनव बारोलिया,जिला विचार विभाग अध्यक्ष प्रिंस सिंह,सहित सैकड़ों कार्यकर्ता उपस्थित थे।कार्यक्रम के अंत में नेहरू को मौन श्रृद्धांजलि अर्पित की गई। ईएमएस / 27 मई 26