भोपाल /भुवनेश्वर (ईएमएस) । अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद की एक-दिवसीय कार्यसमिति बैठक महाप्रभु जगन्नाथ की पावन धरा ओडिशा के भुवनेश्वर स्थित शिक्षा ओ अनुसंधान विश्वविद्यालय में हुई, जिसमें पश्चिम बंगाल में हिंसा, भय और तुष्टिकरण की राजनीति को समाप्त कर लोकतांत्रिक मूल्यों की स्थापना करने हेतु जनमानस का अभिनंदन प्रस्ताव पारित किया गया। बैठक का शुभारंभ अभाविप के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रो. रघुराज किशोर तिवारी, राष्ट्रीय महामंत्री डॉ. वीरेंद्र सिंह सोलंकी एवं राष्ट्रीय संगठन मंत्री आशीष चौहान ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया, जिसमें देशभर के सभी प्रांतों से प्रमुख कार्यकर्ता उपस्थित रहे। बैठक में वर्तमान राष्ट्रीय परिदृश्य, शिक्षा व्यवस्था, युवाओं की भूमिका, राष्ट्रीय सुरक्षा, सामाजिक एवं आर्थिक विषयों, संगठनात्मक समीक्षा एवं विस्तार तथा समसामयिक चुनौतियों पर वृहद विचार-विमर्श हुआ। अभाविप द्वारा लिए गए स्क्रीन टाइम टू एक्टिविटी टाइम अभियान, वंदे मातरम् के 150 वर्ष, छात्रावास सर्वेक्षण अभियान, प्रा. यशवंतराव केलकर जन्मशती वर्ष, आपातकाल निषेध के 50 वर्ष, श्री गुरु तेगबहादुर बलिदान दिवस के 350 वर्ष, संत शिरोमणि रविदास जी के 650वें प्राकट्योत्सव आदि विषयों पर गहन चर्चा हुई। साथ ही, अभियानात्मक, कार्यक्रमात्मक एवं संगठनात्मक विषयों की समीक्षा के साथ अनुवर्तन हेतु विशेष जोर दिया गया। हिंसा, भय और तुष्टिकरण की राजनीति को परास्त कर लोकतांत्रिक मूल्यों की पुन: स्थापना के लिए पश्चिम बंगाल के जनमानस का अभिनंदन विषयक अभिनंदन प्रस्ताव को इस बैठक में पारित किया गया। देशभर से आए प्रतिनिधि कार्यकर्ताओं ने शिक्षा, सामाजिक, आर्थिक, राष्ट्रीय सुरक्षा, वैश्विक परिस्थिति एवं युवाओं से जुड़े समसामयिक विषयों पर चिंतन-मंथन किया, जिस पर आगामी राष्ट्रीय कार्यकारी परिषद में चर्चा के पश्चात प्रस्ताव भी पारित किए जाएँगे। प्रो. रघुराज किशोर तिवारी ने कहा कि, संगठन की आगामी दिशा तय करने के लिए गत वर्षों का सिंहावलोकन और वर्तमान परिस्थितियों का आकलन अत्यंत आवश्यक है; इसमें केंद्रीय कार्यसमिति की इस बैठक का महती स्थान है। द्वारका और श्रृंगेरी में आयोजित संगठनात्मक विचार बैठकें इसी प्रक्रिया का हिस्सा रही हैं, जो आज की आवश्यकता के अनुरूप व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए मील का पत्थर सिद्ध हुई हैं। इस वर्ष प्राध्यापक यशवंतराव केलकर जी की जन्म शताब्दी के उपलक्ष्य में देशभर में हुए प्रबोधन कार्यक्रमों ने कार्यकर्ताओं को उनके आदर्शों और कार्य पद्धति से जोड़कर नई प्रेरणा दी है, जो आज के समय में ज़रूरी है। शैक्षिक क्षेत्र में अभाविप का यह स्पष्ट मत है कि भारत की शिक्षा व्यवस्था भारतीय दर्शन एवं मूल्यों पर आधारित होनी चाहिए, जो युवा पीढ़ी के सर्वांगीण एवं समग्र विकास को सुनिश्चित करने वाले एक एकीकृत शिक्षा तंत्र के निर्माण का मार्ग प्रशस्त करे। डॉ. वीरेंद्र सिंह सोलंकी ने कहा कि, वर्तमान में जब भारत विश्व का नेतृत्व कर रहा है, तब अभाविप, चाहें वह नक्सलवाद का खात्मा हो या शिक्षा में व्याप्त विसंगतियाँ, इनके समाधान के लिए रचनात्मक आंदोलन और संघर्ष के माध्यम से कार्य कर रही है। तेलंगाना में छात्रवृत्ति की लड़ाई हो, नीट पेपर लीक का विषय हो, मुंबई में पेपर लीक के विरुद्ध आंदोलन हो या दिल्ली एवं पंजाब विश्वविद्यालय में छात्रसंघों के माध्यम से किए जा रहे नवाचार, अभाविप ने सदैव ही विद्यार्थी हित में कार्य किया है। त्रिपुरा में जनजातीय छात्र सम्मेलन, ओडिशा में छात्रा संसद, तमिलनाडु में विधि छात्र सम्मेलन और देशभर में मिशन साहसीÓ के अंतर्गत दस लाख से अधिक छात्राओं को आत्मरक्षा का प्रशिक्षण देना, अभाविप की बढ़ती स्वीकार्यता एवं विस्तार का प्रमाण है। इस बैठक में हमने पश्चिम बंगाल में हिंसा, भय और तुष्टिकरण की राजनीति को समाप्त कर लोकतांत्रिक मूल्यों की स्थापना के लिए जनमानस के अभिनंदन का प्रस्ताव भी सर्वसम्मति से पारित किया है। यह बैठक हमें उस आध्यात्मिक ऊर्जा और सकारात्मक दृष्टि से ओत-प्रोत करेगी, जिससे हम अपने-अपने कार्यक्षेत्र में और अधिक गति के साथ राष्ट्र निर्माण के संकल्प को पूर्ण कर सकें। आशीष पाराशर