जनवरी से अब तक 309 हितग्राहियों को मिला लाभ प्रशासन चला रहा विशेष अभियान बालाघाट (ईएमएस). जिले में वन अधिकार अधिनियम के तहत पात्र वनवासियों को अधिकार दिलाने के लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा है। जनवरी 2026 से अब तक 309 हितग्राहियों को वन अधिकार पट्टों का वितरण किया जा चुका है, जिससे वन क्षेत्रों में निवासरत परिवारों को वैधानिक अधिकार मिल रहे हैं। वन अधिकार अधिनियम के अंतर्गत वन भूमि पर काबिज पात्र हितग्राहियों को वन अधिकार पट्टों का वितरण करने के लिए जिले में विशेष अभियान संचालित किया जा रहा है। कलेक्टर मृणाल मीना के निर्देशन में दावा प्रकरणों का त्वरित परीक्षण एवं निराकरण कर पात्र परिवारों को पट्टे प्रदान किए जा रहे हैं। उत्तरी वन मंडल में 51 पट्टों का वितरण जिला प्रशासन के अनुसार उत्तरी सामान्य वन मंडल के अंतर्गत परसवाड़ा तहसील के वन ग्राम आरामटोला, कुकड़ा, कौंदुल, जामुनझिरिया, टाटीघाट एवं टिकरिया तथा बैहर तहसील के वन ग्राम जल्दीडांड एवं सुमेरीखेड़ा में कुल 51 वन अधिकार पट्टों का वितरण किया गया है। दक्षिण वन मंडल में 116 हितग्राही लाभान्वित दक्षिण वन मंडल के अंतर्गत लांजी तहसील के बंजरटोला, बोदादलखा, गुलपुर एवं धीरी, किरनापुर के बोदालझोला, कटंगी के कछार, बालाघाट तहसील के पालागोंदी, वरूडगोटा, माटे एवं कोकमा तथा परसवाड़ा तहसील के लौगुर में कुल 116 पट्टों का वितरण किया गया है। कान्हा बफर क्षेत्र में 142 पट्टे वितरित कान्हा टाइगर रिजर्व के बफर क्षेत्र में आने वाले बिरसा तहसील के सरईपतेरा एवं हथबन तथा बैहर तहसील के जैतपुरी, टोपला, धीरी, पटपरा, घुईटोला एवं समरिया ग्रामों में 142 वन अधिकार पट्टों का वितरण किया गया है। सामुदायिक दावों पर भी चल रहा कार्य प्रशासन द्वारा व्यक्तिगत दावों के साथ-साथ सामुदायिक दावों पर भी कार्य किया जा रहा है। वर्तमान में जिले के 15 ग्रामों में लगभग 200 सामुदायिक दावे तैयार किए जा रहे हैं, जिनका परीक्षण कर आगे की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। हितग्राहियों को योजनाओं से जोडऩे के निर्देश कलेक्टर मृणाल मीना ने संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया है कि वन अधिकार पट्टा प्राप्त करने वाले हितग्राहियों को शासन की विभिन्न योजनाओं से प्राथमिकता के आधार पर जोड़ा जाए। इसमें किसान क्रेडिट कार्ड, उन्नत बीज, उर्वरक तथा समर्थन मूल्य पर उपज विक्रय की सुविधा शामिल है। प्रशासन का मानना है कि वन अधिकार पट्टा मिलने से वन क्षेत्रों में रहने वाले परिवारों को भूमि पर वैधानिक अधिकार मिल रहा है, जिससे वे आत्मनिर्भर बनकर अपने जीवन स्तर में सुधार कर सकेंगे। भानेश साकुरे / 28 मई 2026