राष्ट्रीय
29-May-2026


नई दिल्ली (ईएमएस)। कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को लेकर दुनिया भर में बहस तेज होती जा रही है। इसी बीच पोप लियो चौदहवें और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सोच में एक बड़ी समानता सामने आई है। दोनों नेताओं ने स्पष्ट कहा है कि तकनीक का उद्देश्य केवल तेजी और मुनाफा नहीं, बल्कि मानवता और नैतिक मूल्यों की रक्षा होना चाहिए। रिपोर्ट के अनुसार पोप लियो चौदहवें ने अपनी पहली आधिकारिक धार्मिक टिप्पणी में चेतावनी दी कि यदि कृत्रिम बुद्धिमत्ता पर नैतिक नियंत्रण नहीं रखा गया तो यह मानव गरिमा, रोजगार और सामाजिक संतुलन के लिए खतरा बन सकती है। उन्होंने कहा कि तकनीक इंसानों की सेवा के लिए होनी चाहिए, न कि इंसानों को केवल “डेटा” या “मशीन का हिस्सा” बना देने के लिए। वहीं प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भी कई अंतरराष्ट्रीय मंचों पर “मानव केंद्रित कृत्रिम बुद्धिमत्ता” की वकालत कर चुके हैं। उन्होंने जोर दिया है कि एआई का उपयोग समावेशी विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य और कृषि जैसे क्षेत्रों में जनहित के लिए होना चाहिए। साथ ही डेटा सुरक्षा, पारदर्शिता और जिम्मेदार उपयोग को भी जरूरी बताया है। विशेषज्ञों का मानना है कि दुनिया के दो प्रभावशाली नेताओं का यह साझा संदेश बताता है कि अब वैश्विक स्तर पर एआई के लिए नैतिक नियम और जवाबदेही तय करने की जरूरत महसूस की जा रही है। पोप लियो चौदहवें ने चेतावनी दी कि अनियंत्रित तकनीक समाज में असमानता और डिजिटल गुलामी को बढ़ा सकती है। तकनीक की तेज दौड़ के बीच यह बहस अब और गहरी हो गई है कि भविष्य की कृत्रिम बुद्धिमत्ता कैसी हो — केवल तेज और शक्तिशाली, या फिर मानवीय मूल्यों के प्रति जवाबदेह। सुबोध/२९ -०५-२०२६