लंदन (ईएमएस)। स्मार्टफोन अब केवल मनोरंजन का साधन नहीं रहा, बल्कि ऑनलाइन क्लास, गेम्स, यूट्यूब वीडियो और सोशल मीडिया ने उन्हें स्क्रीन के और करीब ला दिया है। ऐसे में, बच्चों को मोबाइल की इस लत से कैसे बाहर निकाला जाए, यह कई पेरेंट्स के लिए एक बड़ा सवाल है। अच्छी खबर यह है कि डांटने या जबरदस्ती फोन छीनने की बजाय कुछ स्मार्ट पैरेंटिंग ट्रिक्स अपनाकर आप धीरे-धीरे बच्चे की स्क्रीन टाइम की आदत को नियंत्रित कर सकते हैं। पहला महत्वपूर्ण कदम है बच्चे के साथ अधिक समय बिताना। अक्सर बच्चे अकेलेपन या बोरियत महसूस करने पर मोबाइल की ओर आकर्षित होते हैं, क्योंकि उन्हें कोई साथी नहीं मिलता। ऐसे में कोशिश करें कि रोज थोड़ा समय सिर्फ बच्चे के लिए निकालें। उनके साथ बोर्ड गेम खेलें, छोटी-छोटी बातें करें या शाम को टहलने जाएं। परिवार के साथ बिताया गया समय बच्चों का ध्यान मोबाइल से हटाने में मदद करता है और उन्हें यह एहसास दिलाता है कि असली मजा सिर्फ स्क्रीन में नहीं, बल्कि अपने लोगों के साथ भी है। दूसरा, स्मार्टफोन इस्तेमाल के लिए छोटे-छोटे नियम बनाएं। पूरी तरह फोन बंद करना आज के दौर में मुश्किल है, लेकिन इसकी सीमा तय करना आवश्यक है। आप घर में कुछ सिंपल रूल्स बना सकते हैं, जैसे खाना खाते समय मोबाइल नहीं, पढ़ाई के दौरान फोन दूर रहेगा, रात को सोने से एक घंटा पहले स्क्रीन बंद, और दिन में सिर्फ तय समय तक ही मोबाइल इस्तेमाल। शुरुआत में बच्चा नाराज हो सकता है, लेकिन लगातार नियमों का पालन करने और स्वयं पेरेंट्स द्वारा उन नियमों का अनुसरण करने से बच्चा उन्हें अपनाने लगता है। तीसरा उपाय है बच्चों को आउटडोर गेम्स के लिए प्रोत्साहित करना। आजकल ज्यादातर बच्चे घर के अंदर रहना पसंद करते हैं, यही वजह है कि मोबाइल उनका सबसे बड़ा टाइमपास बन जाता है। यदि आप चाहते हैं कि बच्चा स्क्रीन टाइम कम करे, तो उसे आउटडोर एक्टिविटीज में शामिल करें। पार्क में खेलना, साइकिल चलाना, बैडमिंटन खेलना या दोस्तों के साथ समय बिताना बच्चों के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य दोनों के लिए अच्छा माना जाता है। शारीरिक गतिविधि करने वाले बच्चों में चिड़चिड़ापन भी कम देखने को मिलता है और उनकी ऊर्जा सही जगह खर्च होती है। चौथा, नई हॉबीज बच्चों का ध्यान सफलतापूर्वक बदल सकती हैं। हर बच्चे के अंदर कोई न कोई खास टैलेंट जरूर होता है, चाहे वह पेंटिंग, डांस या संगीत में दिलचस्पी दिखाता हो। यदि पेरेंट्स बच्चों की इन रुचियों को पहचानकर बढ़ावा दें, तो मोबाइल की लत काफी हद तक कम हो सकती है। उदाहरण के तौर पर, अगर बच्चा ड्राइंग पसंद करता है, तो उसे कलर किट दिलाएं, या म्यूजिक में रुचि होने पर किसी क्लास में भेज सकते हैं। जब बच्चे का मन रचनात्मक गतिविधियों में लगने लगता है, तो वह खुद स्क्रीन से दूरी बनाना शुरू कर देता है। अंत में, डांटने के बजाय प्यार से समझाना अधिक असरदार होता है। कई घरों में देखा जाता है कि गुस्से में मोबाइल छीनने से बच्चे का गुस्सा और जिद बढ़ सकती है। बेहतर तरीका यह है कि बच्चे को प्यार से समझाया जाए। उसे बताएं कि ज्यादा स्क्रीन देखने से आंखों में दर्द, नींद की समस्या और पढ़ाई में ध्यान कम होने जैसी दिक्कतें हो सकती हैं। सुदामा/ईएमएस 30 मई 2026