राज्य
30-May-2026


- शिकायत करने पर महिलाओं को ही किया जाता है परेशान - तेलंगाना की सिर्फ 12.6% कंपनियों में है शिकायत कमेटी हैदराबाद (ईएमएस)। तेलंगाना में कार्यस्थल पर महिलाओं की सुरक्षा को लेकर एक चौंकाने वाला और चिंताजनक खुलासा हुआ है। राज्य के श्रम विभाग द्वारा किए गए हालिया सर्वे के अनुसार, तेलंगाना की करीब 90 प्रतिशत कंपनियों में अब तक आंतरिक शिकायत समिति का गठन ही नहीं किया गया है। यह स्थिति तब है जब महिलाओं के कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न रोकथाम अधिनियम (पॉश एक्ट) को लागू हुए 13 साल बीत चुके हैं। कानून के मुताबिक, 10 या उससे अधिक कर्मचारियों वाली हर संस्था में इस समिति का होना अनिवार्य है, लेकिन सर्वे के अनुसार तेलंगाना में महज 12.6 प्रतिशत कंपनियों ने ही इसका पालन किया है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस समिति के न होने से पीड़ित महिलाएं या तो चुपचाप उत्पीड़न सहने को मजबूर हैं या फिर नौकरी छोड़ देती हैं। कई बार शिकायत करने वाली महिलाओं को ही मुश्किल कर्मचारी मानकर उन पर काम का अतिरिक्त दबाव बनाया जाता है या उन्हें परफॉर्मेंस इम्प्रूवमेंट प्लान में डाल दिया जाता है। फोरम फॉर आईटी एम्प्लॉइज के अध्यक्ष विनोद कुमार ने भी पुष्टि की है कि महिलाओं को इस्तीफा देने के लिए मजबूर करने के उद्देश्य से अवास्तविक लक्ष्य दिए जाते हैं। पिछले महीने तेलंगाना पुलिस की महिला सुरक्षा शाखा द्वारा शुरू की गई पॉश हेल्पडेस्क को पहले ही महीने में सात शिकायतें मिलीं, जिनमें या तो समिति के न होने या उसके सही से काम न करने की बात सामने आई। महिला सुरक्षा शाखा की डीजीपी चारू सिन्हा ने बताया कि कई बार समिति के सदस्य मामलों के प्रति संवेदनशील नहीं होते। स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इससे भी लगाया जा सकता है कि केंद्र सरकार के शी-बॉक्स पोर्टल पर हैदराबाद की केवल 539 और रंगारेड्डी की 450 कंपनियां ही पंजीकृत हैं। कानूनी विशेषज्ञ यशश्री वासुदेवा और पॉश विशेषज्ञ शिवांगी प्रसाद का कहना है कि कंपनियां तभी जागती हैं जब मामला कोर्ट पहुंचता है। साल 2023 में सुप्रीम कोर्ट ने भी देश में इस कानून के क्रियान्वयन को बेहद निराशाजनक बताते हुए सभी राज्यों को जिला स्तर पर सर्वे कराने के निर्देश दिए थे। रामयश/ईएमएस 30 मई 2026