राष्ट्रीय
30-May-2026


नई दिल्ली (ईएमएस)। बिहार की प्रसिद्ध लीची अर्थव्यवस्था इन दिनों एक नए संकट से जूझ रही है। ‘स्टिंक बग’ नामक कीट के बढ़ते प्रकोप ने राज्य के लीची बागानों को गंभीर नुकसान पहुंचाना शुरू कर दिया है, जिससे किसानों और कृषि विशेषज्ञों की चिंता बढ़ गई है। यह समस्या बिहार की लीची आधारित ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर सीधा असर डाल रही है। विशेषज्ञों के अनुसार यह कीट लीची के फूलों, नई शाखाओं और फल पर हमला करता है और उसका रस चूस लेता है। इसके कारण फल समय से पहले गिर जाते हैं, उनका आकार छोटा रह जाता है और गुणवत्ता भी प्रभावित होती है। कई इलाकों में उत्पादन में भारी गिरावट की आशंका जताई जा रही है। बिहार देश में लीची उत्पादन का प्रमुख केंद्र है और यहां के मुजफ्फरपुर सहित कई जिलों की अर्थव्यवस्था सीधे लीची की खेती पर निर्भर है। अनुमान के अनुसार राज्य में लाखों किसान इस फसल से जुड़े हैं और हर साल हजारों टन लीची का उत्पादन होता है, जो घरेलू बाजार के साथ-साथ अन्य राज्यों और विदेशों तक पहुंचती है। हालांकि इस संकट को देखते हुए सरकार और कृषि वैज्ञानिकों ने कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। एक उच्च स्तरीय विशेषज्ञ टास्क फोर्स का गठन किया गया है, जो कीट नियंत्रण, निगरानी और दीर्घकालिक समाधान पर काम कर रही है। इसमें कृषि विश्वविद्यालयों और शोध संस्थानों के वैज्ञानिक शामिल हैं। किसानों का कहना है कि यदि समय पर प्रभावी नियंत्रण नहीं किया गया तो लीची उत्पादन में भारी गिरावट आ सकती है, जिससे उनकी आय पर गंभीर असर पड़ेगा। कृषि विशेषज्ञ भी मानते हैं कि यह कीट अगर फैलता रहा तो राज्य की लीची अर्थव्यवस्था को दीर्घकालिक नुकसान हो सकता है। फिलहाल प्रशासन और वैज्ञानिक मिलकर इस संकट को नियंत्रित करने की कोशिश में जुटे हैं, ताकि बिहार की ‘शाही लीची’ की पहचान और उत्पादन दोनों सुरक्षित रह सकें। सुबोध/३० -०५-२०२६