नई दिल्ली (ईएमएस)। केंद्र सरकार ने देश के कपड़ा उद्योग को बड़ी राहत देते हुए कच्चे कपास (कॉटन) के आयात पर लगने वाली सभी कस्टम ड्यूटी को अस्थायी रूप से समाप्त कर दिया है। यह छूट 30 अक्टूबर तक लागू रहेगी, जिससे घरेलू उद्योग को कच्चे माल की उपलब्धता बढ़ाने और उत्पादन लागत कम करने में मदद मिलेगी। सरकारी निर्णय के अनुसार यह कदम कपड़ा क्षेत्र में बढ़ती लागत और सप्लाई दबाव को कम करने के उद्देश्य से लिया गया है। इससे यार्न, फैब्रिक और रेडीमेड गारमेंट बनाने वाली कंपनियों को सीधे तौर पर लाभ मिलेगा। उद्योग संगठनों का कहना है कि कच्चे कपास की उपलब्धता में सुधार से उत्पादन स्थिर होगा और निर्यात क्षमता भी मजबूत हो सकती है। जानकारी के अनुसार, यह छूट अस्थायी है और सरकार समय-समय पर बाजार की स्थिति की समीक्षा के बाद निर्णय लेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक बाजार में कपास की कीमतों और घरेलू उत्पादन की स्थिति को देखते हुए यह फैसला उद्योग के लिए राहतकारी साबित हो सकता है। कपड़ा उद्योग लंबे समय से कच्चे माल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और सप्लाई चेन की चुनौतियों का सामना कर रहा है। ऐसे में आयात शुल्क हटने से कंपनियों को अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्रतिस्पर्धा बनाए रखने में मदद मिलने की उम्मीद है। इसके साथ ही छोटे और मध्यम उद्योगों (एसएमई) को भी उत्पादन लागत घटने का फायदा मिल सकता है। हालांकि, इस फैसले को लेकर किसानों के हितों पर भी नजर रखी जा रही है, क्योंकि घरेलू कपास की कीमतों पर इसका असर पड़ सकता है। सरकार ने संकेत दिया है कि वह किसानों और उद्योग दोनों के बीच संतुलन बनाए रखने के लिए स्थिति पर लगातार नजर रखेगी। कुल मिलाकर यह निर्णय कपड़ा क्षेत्र को गति देने और उत्पादन लागत घटाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। सुबोध/३० -०५-२०२६