राज्य
31-May-2026
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- युवाओं को फंसाने के लिए रचा जा रहा डिजिटल जाल - 3 करोड़ गंवाने का मामला आया सामने हैदराबाद (ईएमएस)। ऑनलाइन सट्टेबाजी के अवैध प्लेटफॉर्म अब गुप्त नेटवर्क से बाहर निकलकर हाईटेक डिजिटल मार्केटिंग मशीन में बदल चुके हैं। ये गिरोह सोशल मीडिया के जरिए युवाओं को सीधे निशाना बना रहे हैं। जल्दी अमीर बनने का लालच देने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) से तैयार वीडियो, फर्जी जैकपॉट की कहानियों और बेहद आकर्षक विज्ञापनों का धड़ल्ले से इस्तेमाल किया जा रहा है। इन दिनों इंस्टाग्राम और फेसबुक जैसे लोकप्रिय प्लेटफॉर्म्स पर इन बेटिंग ऐप्स के शॉर्ट वीडियो और रील्स की बाढ़ आई हुई है। युवाओं को जाल में फंसाने के लिए विज्ञापन में महंगी कारें, आलीशान लाइफस्टाइल और नकद इनाम दिखाए जाते हैं। ये विज्ञापन सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स के कंटेंट जैसे दिखते हैं, जिससे आम यूजर्स के लिए असली-नकली का फर्क करना मुश्किल हो जाता है। पहले ये गिरोह चोरी-छिपे काम करते थे, लेकिन अब ऑपरेटर एआई की मदद से कम लागत में लाखों लोगों तक भ्रामक विज्ञापन पहुंचा रहे हैं। साइबर अपराध जांच एजेंसियों के लिए यह बड़ी चुनौती बन गया है। फर्जी अकाउंट्स और प्रतिष्ठित ब्रांडों के नाम के गलत इस्तेमाल के कारण इन पर पूरी तरह रोक लगाना मुश्किल हो रहा है। पुलिस अधिकारी एस.जी. शिव शंकर ने बताया कि हालांकि एआई-जनित विज्ञापनों की तकनीकी रूप से स्पष्ट पहचान अभी बाकी है, लेकिन सोशल मीडिया इन ऑपरेटरों का मुख्य जरिया बना हुआ है। पिछले वर्ष तेलंगाना पुलिस और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने इस मामले में टॉलीवुड कलाकारों और इन्फ्लुएंसर्स पर बड़ी कार्रवाई की थी। यह जांच उन पीड़ितों की शिकायतों के बाद शुरू हुई जिन्होंने भारी वित्तीय नुकसान उठाया था। ऐसा ही एक चौंकाने वाला मामला सामने आया जहां एक व्यक्ति ने यूट्यूब विज्ञापनों से प्रभावित होकर सट्टेबाजी में अपने करीब 3 करोड़ रुपये गंवा दिए। जांच एजेंसियों के अनुसार, डिजिटल मार्केटिंग के और आधुनिक होने के साथ ये नेटवर्क पहले से ज्यादा तेज और आक्रामक हो चुके हैं। - ईएमएस 31 मई 2026