राज्य
31-May-2026
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- रिपोर्ट में चौंकाने वाला खुलासा, वयस्कों में मोटापा भी बढ़ा भुवनेश्वर (ईएमएस)। ओडिशा में बच्चों में कुपोषण की समस्या लगातार गंभीर होती जा रही है। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, राज्य में पांच वर्ष से कम उम्र के 22.1 प्रतिशत बच्चे वेस्टिंग यानी अपनी लंबाई के मुकाबले बेहद कम वजन की गंभीर श्रेणी में हैं। यह स्थिति चिंताजनक इसलिए है क्योंकि यह आंकड़ा राष्ट्रीय औसत (19 प्रतिशत) से काफी ज्यादा है। रिपोर्ट के आंकड़े बताते हैं कि ओडिशा में पिछले कुछ वर्षों में स्थिति सुधरने के बजाय और बिगड़ी है। पिछले सर्वेक्षण में वेस्टिंग का शिकार बच्चों का प्रतिशत 18.1 प्रतिशत था, जो अब बढ़कर 22.1 प्रतिशत हो गया है। हैरानी की बात यह है कि इस समस्या में ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के बीच कोई खास अंतर नहीं देखा गया है। देश भर में सबसे ज्यादा वेस्टिंग दर मध्य प्रदेश (23.8 प्रतिशत ) और झारखंड (22.3 प्रतिशत ) में है, जिसके ठीक बाद अब ओडिशा सबसे प्रभावित राज्यों में शामिल हो गया है। इसके अलावा, राज्य में कम वजन (अंडरवेट) वाले बच्चों की तादाद भी 29.7 प्रतिशत से बढ़कर 31.6 प्रतिशत हो गई है, जबकि इसी अवधि में राष्ट्रीय स्तर पर अंडरवेट बच्चों की संख्या में कमी आई है। पूर्व जनस्वास्थ्य निदेशक डॉ. निरंजन मिश्रा ने इस पर चिंता जताते हुए कहा कि वेस्टिंग कुपोषण का सबसे खतरनाक रूप है। इससे बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होती है और उनमें मृत्यु का खतरा बढ़ जाता है। हालांकि, राहत की बात यह रही कि राज्य में स्टंटिंग (उम्र के हिसाब से कम लंबाई) के मामलों में सुधार हुआ है और यह आंकड़ा 31 प्रतिशत से घटकर 26.8 प्रतिशत पर आ गया है, जो राष्ट्रीय औसत (29.3 प्रतिशत ) से बेहतर है। रिपोर्ट में एक और विरोधाभासी और चिंताजनक पहलू सामने आया है। जहां एक तरफ बच्चे पोषण की कमी से जूझ रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ वयस्कों में मोटापा तेजी से बढ़ रहा है। ओडिशा में अधिक वजन या मोटापे से ग्रस्त महिलाओं की संख्या 23 से बढ़कर 29.7 प्रतिशत और पुरुषों की संख्या 22.2 से बढ़कर 27.8 प्रतिशत हो गई है। जनस्वास्थ्य विशेषज्ञ इसे डबल बर्डन ऑफ मालन्यूट्रिशन (कुपोषण का दोहरा बोझ) कह रहे हैं, जहां एक ही समाज में एक तरफ अत्यधिक कमजोरी और दूसरी तरफ मोटापा व उससे जुड़ी जीवनशैली की बीमारियां एक साथ पैर पसार रही हैं। - ईएमएस 31 मई 2026