राज्य
31-May-2026
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- रटने के बजाय कहानियों से सीखेंगे गणित और भाषा - 1 जून से शिक्षकों को मिलेगी ट्रेनिंग चेन्नई (ईएमएस)। राज्य बोर्ड के प्राथमिक स्कूलों में अब बच्चों के लिए पढ़ाई का तरीका पूरी तरह बदलने जा रहा है। कक्षा 1 से 3 तक के छात्रों को अब गणित और भाषा जैसे विषय पारंपरिक या उबाऊ तरीके से नहीं, बल्कि कहानियों, रंगीन चित्रों और मजेदार गतिविधियों के जरिए पढ़ाए जाएंगे। नई शिक्षा नीति (एनईपी) के तहत तैयार की गई इन नई पाठ्यपुस्तकों का मुख्य उद्देश्य सीखने की प्रक्रिया को रोचक और व्यावहारिक बनाना है। अब बच्चों को ब्लैकबोर्ड पर संख्याएं लिखकर रटवाने का दौर खत्म होगा। उदाहरण के तौर पर, नई किताबों में एक घायल गौरैया द्वारा घोंसला बनाने के लिए टहनियां जुटाने की कहानी दी गई है। इस कहानी के माध्यम से बच्चे न सिर्फ गिनती, जोड़ और घटाव सीखेंगे, बल्कि आकृतियों की पहचान, अंडों की संख्या और दया जैसे नैतिक मूल्यों को भी समझ सकेंगे। किताबों में बड़े अक्षरों का उपयोग किया गया है और हर पाठ से पहले आकर्षक चित्रों वाली कहानी जोड़ी गई है। स्कूल शिक्षा सचिव बी. चंद्र मोहन ने बताया कि इस बदलाव का मकसद बच्चों में किताबों के प्रति रुचि और आनंद जगाना है। इसके लिए बकायदा कहानी लेखन विशेषज्ञों को पाठ्यपुस्तक समिति में शामिल किया गया था। अब भाषा सीखने की शुरुआत वर्णमाला रटने से नहीं, बल्कि नाटक, गीत, आपसी बातचीत और एक-दूसरे का अभिवादन करने से होगी। शिक्षा विभाग के अनुसार, अब बच्चे सुनने और बोलने की प्राकृतिक प्रक्रिया के माध्यम से भाषा सीखेंगे। इन किताबों में व्यक्तिगत स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण और बुजुर्गों के प्रति सम्मान जैसे जरूरी जीवन कौशलों को भी शामिल किया गया है। इसके अलावा, शिक्षकों की सुविधा के लिए वर्कबुक और पाठ्यपुस्तक को एक साथ जोड़ दिया गया है, जिससे उनका काम आसान हो जाएगा। राज्य शिक्षा विभाग 1 से 3 जून तक प्राथमिक शिक्षकों को इन नई पुस्तकों से पढ़ाने का विशेष प्रशिक्षण देगा। हालांकि, शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस नई व्यवस्था की वास्तविक सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि शिक्षक क्लास में बच्चों को खुलकर अभिव्यक्ति का कितना अवसर देते हैं। - ईएमएस 31 मई 2026