राज्य
31-May-2026


इन्दौर (ईएमएस) मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय खंडपीठ इन्दौर में जस्टिस जय कुमार पिल्लई की एकलपीठ ने पीडब्ल्यूडी द्वारा बनाए जा रहे ब्रिज की डिजाइन को लेकर विवाद के बाद हटाएं गये सहायक यंत्री की याचिका पर सुनवाई दौरान स्पष्ट किया कि केवल सामान्य आरोपों के आधार पर किसी कर्मचारी को निलंबित नहीं किया जा सकता। आदेश में स्पष्ट होना चाहिए कि कर्मचारी के खिलाफ कौन-सी विभागीय जांच लंबित है, या किन तथ्यों पर कार्रवाई की जा रही है। कोर्ट ने उनके निलंबन आदेश के संचालन और प्रभाव पर अंतरिम रोक लगा दी है। ज्ञात हो कि पोलोग्राउंड से एमआर-4 तक तीन दिशाओं में यातायात सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से बनने वाला रेलवे ओवरब्रिज करीब 1027.60 मीटर लंबा और 12 मीटर चौड़ा डिजाइन किया गया और पुल की संरचना में पोलोग्राउंड, लक्ष्मीबाई स्टेशन और भागीरथपुरा की ओर जाने वाली शाखाएं हैं। जिसकी 90 डिग्री घुमावदार डिजाइन को लेकर तकनीकी और सुरक्षा संबंधी सवाल उठने के बाद यह ब्रिज विवादों में आ गया और‌ इन्हीं विवादों के बाद संबंधित अधिकारियों की भूमिका की जांच और उनके खिलाफ कार्रवाई शुरू करते (पीडब्ल्यूडी) की सहायक यंत्री एवं प्रभारी कार्यपालन यंत्री गुरनीत कौर भाटिया को निलंबित कर दिया गया था। उन्होंने अपने निलंबन आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती देते याचिका दायर की जिसमें कोर्ट को बताया कि आदेश में न तो किसी विशेष आरोप का उल्लेख है और न ही प्रस्तावित या लंबित विभागीय जांच की जानकारी दी गई है। जिस पर कोर्ट ने सरकार से जवाब-तलब किया परन्तु सरकार के जवाब नहीं देने पर नाराजगी जताते कोर्ट ने कहा कि सरकार यह भी नहीं बता सकी कि निलंबन से पहले सक्षम प्राधिकारी ने नियमों के अनुरूप आवश्यक विचार-विमर्श किया था। कोर्ट ने निलंबन आदेश पर अगली सुनवाई तक अंतरिम रोक लगा सरकार को विस्तृत जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। आनंद पुरोहित/ 31 मई 2026