रांची(ईएमएस)।परिसीमन के मुद्दे को लेकर रविवार को प्रेस क्लब स्थित सभागार में राज्यभर से आदिवासी प्रतिनिधि जुटे। प्रतिनधियों ने परिसीमन की वजह से होनेवाली चुनौतियों व रणनीति पर विचार किया।बैठक में परिसीमन के संदर्भ में जनजातीय समाज की एक ड्राफ्टिंग कमेटी का गठन करने पर सहमति बनी जो अपनी रिपोर्ट तैयार कर लोकसभा में प्रतिपक्ष के नेता से मिलेगी। 17 जून को रांची में परिसीमन संबंधी मुद्दों पर चर्चा करने के लिये सभी राजनीतिक दलों की बैठक बुलाने पर भी निर्णय हुआ।इसके अलावा कहा गया कि दो अगस्त को रांची में आदिवासी एकता महजुटान रैली का आयोजन किया जायेगा। दिल्ली में भी परिसीमन को लेकर बैठक की जायेगी।बैठक की तैयारी का जिम्मा लोहरदगा के सांसद सुखदेव भगत एवं खूंटी के सांसद कालीचरण मुंडा को सौंपा गया है। आज परिचर्चा में झारखंड सरकार के समन्वय समिति के सदस्य बंधु तिर्की ने कहा कि राज्य में लोकसभा एवं विधानसभा के निर्वाचन क्षेत्रों के परिसीमन का आदिवासियों के ऊपर कोई भी नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ने देंगे। श्री तिर्की में कहा कि जिस प्रकार से परिसीमन करके दूसरे प्रदेशों में अनुसूचित जनजाति के लिये सुरक्षित निर्वाचन क्षेत्रों की संख्या घटाने की कोशिशें की जा रही है वैसा कोई भी प्रयास झारखंड में सफल नहीं होगा और यदि ऐसा होगा तो इसका पुरजोर विरोध किया जायेगा। शोधकर्ता लेखक ग्लैडसन डुंगडुंग ने कहा कि अनुसूचित क्षेत्र के निर्धारण का आधार जनसंख्या नहीं बल्कि ऐतिहासिक आधार है। झारखंड का छोटानागपुर क्षेत्र और कई अन्य इलाके आदिवासी क्षेत्र है और इसी वजह से यह अनुसूचित क्षेत्र है। ग्लैडसन ने कहा कि यहां के पांचवीं अनुसूचित क्षेत्रो में कभी भी बाहरी जनसंख्या को आने से नहीं रोका गया। इसी वजह से यहां आदिवासी जनसंख्या में कमी आयी है। शशि पन्ना ने कहा कि परिसीमन को लेकर यह महत्वपूर्ण बैठक हैं और हमलोग राज्यभर से प्रतिनिधि यहां इकट्ठा हुए हैं।वाल्टर कंडुलना ने कहा कि हमलोगों ने अनुसूचित क्षेत्र की अवधारणा को छोड़ा और राजक्षेत्र की अवधारणा को अपनाया है।सामान्य कानून लागू होने की वजह से यहां बाहरी जनसंख्या बढ़ी और आदिवासी जनसंख्या में पलायन की वजह से कमी आयी है।परिचर्चा में दयामनी बरला, वासवी किड़ो, आलोका, रमा खलखो, अनिल पन्ना, रामचंद्र उरांव, अजय सिंह चेरो सहित अन्य वक्ताओं ने भी संबोधित किया। कर्मवीर सिंह/31मई/26