- जीटीआरआई ने बताया, होर्मुज के बाहर ओमान का तट भारत के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण नई दिल्ली (ईएमएस)। भारत और ओमान के बीच व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौता (सीईपीए) सिर्फ द्विपक्षीय व्यापार बढ़ाने से कहीं अधिक रणनीतिक महत्व रखता है। आर्थिक शोध संस्थान जीटीआरआई (ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव) के अनुसार, ओमान की अद्वितीय भौगोलिक स्थिति, जिसका अधिकतर तट होर्मुज जलडमरूमध्य के बाहर स्थित है, भारत के लिए क्षेत्रीय संघर्ष या भू-राजनीतिक अस्थिरता के दौरान एक विश्वसनीय व्यापार और ऊर्जा मार्ग सुनिश्चित करती है। यह समझौता भारत की दीर्घकालिक ऊर्जा एवं आर्थिक सुरक्षा में एक महत्वपूर्ण निवेश है। जीटीआरआई ने रेखांकित किया है कि होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्गों में से एक है, जो वैश्विक दैनिक तेल खपत का लगभग 20 प्रतिशत और समुद्री तेल व्यापार का 25 प्रतिशत संभालता है। हालांकि, अमेरिका-ईरान संघर्ष जैसी भू-राजनीतिक अस्थिरता के कारण यह मार्ग अक्सर जोखिमपूर्ण या भीड़भाड़ वाला हो जाता है, जिससे सऊदी अरब, कतर और संयुक्त अरब अमीरात जैसे प्रमुख खाड़ी देशों से भारत को तेल एवं गैस की आपूर्ति प्रभावित हुई है और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई है। इसके विपरीत ओमान का बड़ा तटीय क्षेत्र होर्मुज जलडमरूमध्य के बाहर, सीधे अरब सागर और ओमान की खाड़ी पर स्थित है। इससे सलालाह और दुक्म जैसे उसके प्रमुख बंदरगाह किसी भी व्यवधान के बावजूद भारत के लिए सुलभ रहते हैं। जीटीआरआई ने कहा, इसी कारण खाड़ी क्षेत्र में संघर्ष या अस्थिरता के समय भी ओमान एक भरोसेमंद व्यापार और ऊर्जा मार्ग बना रह सकता है। भारत-ओमान सीईपीए, जिस पर पिछले वर्ष दिसंबर में हस्ताक्षर किए गए थे और जो एक जून से लागू हो गया है, इसी रणनीतिक आवश्यकता को पूरा करता है। आंकड़ों से इस बात की पुष्टि होती है कि जब खाड़ी क्षेत्र में अस्थिरता के कारण एक अवधि में अन्य प्रमुख खाड़ी देशों से भारत का आयात घट गया, तब ओमान एक अपवाद बना। ओमान से भारत का आयात 246.4 प्रतिशत बढ़कर लगभग 1.5 अरब डॉलर हो गया, जिसका मुख्य कारण कच्चे तेल और यूरिया की अधिक खरीद रही। वहीं ओमान को भारत का निर्यात भी केवल 10.3 प्रतिशत ही घटा। यह स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि जब होर्मुज जलडमरूमध्य जोखिमपूर्ण हो जाता है, तब ओमान भारत के लिए एक भरोसेमंद वैकल्पिक व्यापार एवं ऊर्जा मार्ग की भूमिका निभा सकता है। जीटीआरआई ने जोर दिया कि यह समझौता भारत की दीर्घकालिक रणनीतिक हितों की रक्षा करता है। सतीश मोरे/01जून ---